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पुष्कर में अंतिम संस्कार के चार दिन बाद जिंदा मिला शख्स

राजस्थान के पुष्कर में जिस नाथू रैगर का परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया, वह चार दिन बाद जिंदा मिला। अब पुलिस DNA जांच से मृतक की पहचान करेगी।

enews bharat9 October 2026
पुष्कर में अंतिम संस्कार के चार दिन बाद जिंदा मिला शख्स

पुष्कर में अंतिम संस्कार के चार दिन बाद जिंदा मिला नाथू, पुलिस भी हैरान

जिस व्यक्ति का परिवार चार दिन पहले अंतिम संस्कार कर चुका था, वही अचानक जिंदा मिल गया! अब सवाल यह है कि अगर नाथू रैगर जिंदा है, तो आखिर उस शव का अंतिम संस्कार किसका किया गया? राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर से सामने आए इस मामले ने परिवार से लेकर पुलिस तक को उलझाकर रख दिया है। जिस घर में मौत का मातम था, वहां नाथू के वापस मिलने से खुशी लौट आई, लेकिन दूसरी तरफ एक अज्ञात व्यक्ति की पहचान का रहस्य गहरा गया।

अस्पताल के पीछे मिला था अज्ञात व्यक्ति का शव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 सितंबर को पुष्कर के सरकारी अस्पताल के पीछे एक अज्ञात युवक का शव मिला था। पुलिस ने शव की तलाशी ली तो उसकी जेब से एक अस्पताल की पर्ची मिली। इस पर्ची पर नाथू पुत्र शंकर रैगर का नाम और संपर्क नंबर लिखा हुआ था।

पर्ची पर दर्ज जानकारी के आधार पर पुलिस ने परिवार से संपर्क किया। इसके बाद मामला आगे बढ़ा और नाथू के परिजन पुष्कर थाने पहुंचे।

परिवार ने शव को नाथू समझकर किया अंतिम संस्कार

रिपोर्ट के अनुसार, नाथू के भाई और बेटे ने मोर्चरी में रखे शव की पहचान नाथू के रूप में की। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई और शव परिजनों को सौंप दिया गया।

नाथू की पत्नी मनभर देवी के मुताबिक, उन्हें पति की मौत की सूचना मिली थी। उनका कहना था कि शव का चेहरा उन्हें नहीं दिखाया गया। उन्हें बताया गया कि शव की हालत खराब होने के कारण उसे देखना मुश्किल था।

परिवार ने उपलब्ध जानकारी और परिस्थितियों के आधार पर शव को नाथू का मान लिया और अंतिम संस्कार कर दिया। घर में शोक की रस्में पूरी होने लगीं। परिजनों को यही विश्वास था कि नाथू अब इस दुनिया में नहीं है।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद ऐसा हुआ, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

चार दिन बाद मजदूरी करता मिला नाथू

नाथू के अंतिम संस्कार के करीब चार दिन बाद परिवार को जानकारी मिली कि वह जिंदा है और मजदूरी कर रहा है। परिजन बताए गए स्थान पर पहुंचे तो नाथू को जीवित देखकर हैरान रह गए।

जिस व्यक्ति को मृत मानकर परिवार अंतिम विदाई दे चुका था, वह सामने खड़ा था। परिवार के लिए यह किसी बड़े सदमे के बाद मिली राहत जैसा था। घर में जहां कुछ दिन पहले मातम का माहौल था, वहीं नाथू के वापस मिलने से खुशी लौट आई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाथू भवन निर्माण से जुड़ा मजदूर है और पहले भी कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहता था। उसकी इसी आदत के कारण परिवार को उसकी गैरमौजूदगी पर तत्काल संदेह नहीं हुआ।

अब सबसे बड़ा सवाल—जिसका अंतिम संस्कार हुआ, वह कौन था?

नाथू के जिंदा मिलने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो गया। अगर नाथू जीवित है, तो अस्पताल के पीछे मिला वह शव आखिर किसका था?

उस अज्ञात व्यक्ति की जेब में नाथू के नाम की अस्पताल की पर्ची कैसे पहुंची? क्या शव की पहचान करने में गलती हुई थी? क्या किसी दूसरे व्यक्ति की पर्ची उसके पास पहुंच गई थी? इन सवालों के जवाब अभी जांच के विषय हैं।

इस मामले में बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति या विभाग को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। जरूरी है कि शव की पहचान और पूरी घटना की परिस्थितियों की जांच तथ्यों के आधार पर की जाए।

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DNA जांच से खुलेगा रहस्य

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने अज्ञात शव का DNA सैंपल सुरक्षित रखा है। अब DNA जांच के जरिए मृत व्यक्ति की असली पहचान पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

DNA जांच से यह पुष्टि करने में मदद मिल सकती है कि मृतक कौन था और उसका नाथू के परिवार से कोई जैविक संबंध था या नहीं। इसके बाद पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि मृत व्यक्ति के पास नाथू के नाम की पर्ची कैसे पहुंची।

फिलहाल, जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस मामले की असली तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

इस घटना ने शव की पहचान करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी अज्ञात व्यक्ति की पहचान केवल एक पर्ची या दस्तावेज के आधार पर तय करना जोखिम भरा हो सकता है, खासकर तब जब शव की पहचान को लेकर कोई संदेह हो।

ऐसे मामलों में पहचान की पुष्टि के लिए उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और जरूरत पड़ने पर वैज्ञानिक जांच का सहारा लेना महत्वपूर्ण होता है।

हालांकि, इस मामले में वास्तव में कहां और किस स्तर पर गलती हुई, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस का मुख्य उद्देश्य मृत व्यक्ति की पहचान करना और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ना है।

एक परिवार को मिली खुशी, लेकिन दूसरे परिवार का इंतजार बाकी

नाथू के जिंदा मिलने से उसके परिवार को बड़ी राहत मिली है। लेकिन इस कहानी का दूसरा पहलू भी है। जिस अज्ञात व्यक्ति का अंतिम संस्कार नाथू समझकर किया गया, उसकी अपनी पहचान और परिवार भी हो सकता है।

अगर मृतक के परिजन उसकी तलाश कर रहे हैं, तो उसकी सही पहचान सामने आना उनके लिए भी बेहद जरूरी है। यही वजह है कि इस मामले में DNA जांच और पुलिस की पड़ताल महत्वपूर्ण है।

अब देखना होगा कि DNA रिपोर्ट इस रहस्य से पर्दा कब उठाती है और उस व्यक्ति की पहचान कैसे सामने आती है, जिसका अंतिम संस्कार नाथू समझकर कर दिया गया था।


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