Hockey World Cup में Argentina से हारकर भारत हुआ बाहर
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व दिग्गज गोलकीपर और दो बार के ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट पीआर श्रीजेश ने हॉकी वर्ल्ड कप में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम मैनेजमेंट और पूरे सिस्टम पर तीखा हमला बोला है। पुरुष और महिला दोनों भारतीय टीमें वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो चुकी हैं। इसके बाद श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट के जरिए टीम की तैयारियों, कोचिंग और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।
अर्जेंटीना से हारकर सेमीफाइनल से बाहर हुई पुरुष टीम
भारतीय पुरुष हॉकी टीम को सोमवार को अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 से हार का सामना करना पड़ा। यह मुकाबला नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन स्थित वैगनर हॉकी स्टेडियम में खेला गया। इस हार के साथ भारत का सेमीफाइनल में पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। अब भारतीय टीम सातवें स्थान के लिए बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला करेगी।
वहीं, भारतीय महिला टीम भी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी सेकेंड राउंड मुकाबला 0-0 से ड्रॉ खेलने के बाद सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गई। गोल अंतर के आधार पर ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल में पहुंच गया, जबकि भारत का सफर यहीं समाप्त हो गया।
श्रीजेश ने पूछा- आखिर जवाबदेही किसकी है?
दोनों टीमों के वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद श्रीजेश ने भारतीय हॉकी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने खासतौर पर इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि बड़े टूर्नामेंट में नाकामी के बाद जवाबदेही तय करने के बजाय अगले टूर्नामेंट का हवाला देकर मौजूदा असफलता को पीछे छोड़ने की कोशिश की जाती है।
श्रीजेश ने अपने बयान में तंज करते हुए कहा कि वर्ल्ड कप मायने नहीं रखता और अब एशियन गेम्स आने वाले हैं। वहां मेडल जीतकर फिर लॉस एंजिलिस 2028 के सपने देखे जा सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अगले टूर्नामेंट की सफलता वर्ल्ड कप में हुई गलतियों को छिपाने के लिए पर्याप्त है।
महिला टीम की तैयारी पर भी उठाए सवाल
पीआर श्रीजेश ने भारतीय महिला हॉकी टीम की तैयारियों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कप से ठीक पहले महिला टीम के चीफ कोच छुट्टी पर थे। इसके बावजूद खिलाड़ियों ने पूरी मेहनत और जज्बे के साथ संघर्ष किया और उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश की।
श्रीजेश का सवाल था कि किसी बड़े टूर्नामेंट की तैयारियों के आखिरी और महत्वपूर्ण चरण में अगर टीम का चीफ कोच मौजूद नहीं हो, तो क्या टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकती है? उन्होंने खिलाड़ियों के प्रयास की सराहना करते हुए सिस्टम और मैनेजमेंट की जवाबदेही पर सवाल खड़ा किया।
'लर्निंग एक्सपीरियंस' के नाम पर कब तक बचेंगे?
श्रीजेश ने पुरुष टीम के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारतीय टीम किसी मजबूत टीम से हारती है, तो उस हार को अक्सर 'लर्निंग एक्सपीरियंस' यानी सीखने का अनुभव बताया जाता है। वहीं, जब टीम किसी एशियाई टीम को हरा देती है तो उसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया जाता है।
उन्होंने पूछा कि आखिर भारतीय हॉकी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। क्या लक्ष्य सिर्फ ऐसी टीम तैयार करना है जो अच्छी हॉकी खेले या ऐसी टीम बनाना है जो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ लगातार जीत दर्ज कर सके?
वर्ल्ड कप कोई रिहर्सल नहीं है: श्रीजेश
श्रीजेश ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि वर्ल्ड कप किसी अभ्यास मैच या रिहर्सल की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक 'लर्निंग', 'गुड हॉकी' और भविष्य में आने वाले टूर्नामेंट्स के पीछे छिपकर मौजूदा कमियों से बचने की कोशिश बंद होनी चाहिए।



