तहसील क्षेत्र के गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों, खासकर गरीब तबके के लोगों को घर बनाने के लिए मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता 2016 से अब तक नहीं बढ़ाई गई है, जबकि इस दौरान निर्माण सामग्री की कीमतों में काफी वृद्धि हो चुकी है।
पाडलिया गांव के लाभार्थी रामहेत बैरवा, छीतरलाल बैरवा, दिनेश बैरवा, महिला यशोदा और राजकरणता ने बताया कि “राज भी रूठा, भगवान भी रूठा” जैसी स्थिति बन गई है। लंबे समय से पत्थर, रेत और अन्य निर्माण सामग्री की ऊँची कीमतों और उनकी अनुपलब्धता के कारण प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
लाभार्थियों का कहना है कि फसल उत्पादन में भी लागत बढ़ने से आमदनी नहीं निकल रही है, जिससे घर निर्माण का खर्च उठाना और भी कठिन हो गया है। वर्तमान में योजना के तहत मिलने वाली 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि बढ़ती महंगाई के हिसाब से बहुत कम है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट, पत्थर और रेत जैसी सामग्रियों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे तय बजट में घर बनाना संभव नहीं हो पा रहा है। लाभार्थियों ने सरकार से मांग की है कि निर्माण सामग्री की कीमतों पर नियंत्रण, आपूर्ति की बेहतर व्यवस्था और योजना की अनुदान राशि को महंगाई के अनुसार बढ़ाया जाए।
ग्राम पंचायत ग्राम विकास अधिकारी विष्णु गोठनियां ने बताया कि हिगोनियां ग्राम पंचायत में वर्ष 2024-25 के लिए 125 मकानों की सूची है, जिनमें से अब तक केवल 23 आवास ही पूर्ण हो पाए हैं। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को बार-बार समझाइश दी जाती है, लेकिन अधिकांश लोग पैसे की कमी का हवाला देकर निर्माण कार्य अधूरा छोड़ देते हैं।
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