सवाई माधोपुर में पशुपालन को लाभकारी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत एक दिवसीय एफआईजी पशुपालक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, आलनपुर में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में पशुपालकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने की। उन्होंने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करके पशुपालन को आय का मजबूत स्रोत बनाया जा सकता है। उन्होंने मंगला पशु बीमा योजना, नस्ल सुधार कार्यक्रम (सेक्स सॉर्टेड सीमन), मोबाइल वेटरनरी यूनिट, पशुधन निःशुल्क आरोग्य योजना, उष्ट्र संरक्षण योजना, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम जैसी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी।
परियोजना निदेशक (आत्मा) अमर सिंह ने कृषि और पशुपालन के समन्वय पर जोर देते हुए अजोला घास के उपयोग से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीक समझाई। उन्होंने बताया कि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी है।
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्योति गुप्ता ने पशुओं में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि नियमित देखभाल से पशुधन की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
वहीं शिविर प्रभारी डॉ. रामसिंह मीणा ने संतुलित आहार, उन्नत नस्लों के चयन और वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी देते हुए पशुपालकों को आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण शिविर के अंत में प्रतिभागी पशुपालकों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। अधिकारियों ने उन्हें नई तकनीकों को अपनाकर पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने और आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया।
यह शिविर न केवल पशुपालकों के ज्ञान में वृद्धि का माध्यम बना, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।




