परवन परियोजना के पंप हाउस निर्माण पर उठे सवाल, किसानों ने जांच की मांग की
परवन वृहद सिंचाई परियोजना के तहत जिले के विभिन्न गांवों में किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए डिग्गियों के साथ नौ स्थानों पर पंप हाउसों का निर्माण कार्य चल रहा है। एक पंप हाउस की अनुमानित लागत 5 से 6 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले इन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर किसानों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
किसानों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बनास बजरी के स्थान पर एम-सैंड और डस्ट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि निर्माण स्थलों पर परियोजना विभाग के अधिकारी मौजूद नहीं रहते, जिसके कारण ठेकेदार मनमर्जी से कार्य कर रहे हैं।
बोहत और खेड़ली गांव के किसानों ने जिला प्रशासन से निर्माण कार्यों की जांच कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि सरकार ने परवन परियोजना के माध्यम से सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर किसानों को लाभ पहुंचाने की योजना बनाई है, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के चलते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
परियोजना के तहत खेड़ली और बोहत सहित नौ स्थानों पर पंप हाउस बनाए जा रहे हैं। बोहत स्थित पंप हाउस से लगभग 3400 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जबकि जिले में करीब 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलने का दावा किया जा रहा है।
इस संबंध में परवन परियोजना के अधिशासी अभियंता से संपर्क करने पर बताया गया कि वे अवकाश पर हैं। वहीं सहायक अभियंता यशवंत नागर ने कहा कि यदि निर्माण कार्य में डस्ट का उपयोग किया जा रहा है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि विभागीय जिम्मेदारी संभालने के बाद मामले को देखा जाएगा। साथ ही ठेकेदार को निर्माण कार्य की 8 वर्ष की गारंटी भी दी गई है और गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी उसी की है।




