संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार पांचवें दिन भी बाधित, विपक्ष के हंगामे के चलते सोमवार तक स्थगित
नई दिल्ली।संसद के मानसून सत्र में जारी राजनीतिक गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण सुचारु रूप से नहीं चल सकी। यह लगातार पांचवां दिन रहा जब संसद की कार्यवाही बाधित हुई। बार-बार व्यवधान और नारेबाजी के बीच दोनों सदनों की कार्यवाही अंततः सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण पहले कार्यवाही को कुछ समय के लिए रोका गया, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं होने पर पीठासीन अधिकारियों ने पूरे दिन की कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लिया।
लगातार पांचवें दिन नहीं चल सकी संसद
मानसून सत्र की शुरुआत से ही कई मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष लगातार सरकार से विभिन्न मामलों पर जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन हंगामे के माहौल में सदन की कार्यवाही चलाना संभव नहीं है।
लगातार पांच दिनों तक संसद का सामान्य कामकाज प्रभावित होने से कई महत्वपूर्ण विधेयकों, सरकारी प्रस्तावों और जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा नहीं हो सकी।
विपक्ष ने उठाए कई अहम मुद्दे
विपक्षी दलों ने सदन में कई राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की मांग की। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इन विषयों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए और संसद में विस्तृत बहस होनी चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार ने विपक्ष पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। सरकार का कहना है कि विपक्ष को विरोध दर्ज कराने के बजाय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बहस में हिस्सा लेना चाहिए।
सरकार ने बातचीत के दिए संकेत
संसदीय कार्य मंत्री और सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए कि गतिरोध समाप्त करने के लिए विपक्ष से बातचीत का रास्ता खुला है। सरकार चाहती है कि संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चले ताकि लंबित विधायी कार्य पूरे किए जा सकें।
हालांकि विपक्ष का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर चर्चा नहीं होगी, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
कई महत्वपूर्ण विधेयक अटके
संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने से कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो पा रही है। इससे सरकार के विधायी एजेंडे पर भी असर पड़ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो पूरे मानसून सत्र की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।




