भारत में पेपरलीक पर कई कानून बने, लेकिन कागजों पर ही क्यों रह जाते हैं? एक्सपर्ट ने ये कहा
नई दिल्ली। भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपरलीक की घटनाएं लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। पेपरलीक को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से समय-समय पर कई कानून और सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके बावजूद अलग-अलग परीक्षाओं में पेपरलीक और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कानून बनने के बाद भी पेपरलीक की समस्या पूरी तरह खत्म क्यों नहीं हो पा रही है?
पेपरलीक का सीधा असर लाखों छात्रों पर पड़ता है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, कोचिंग लेते हैं और आर्थिक व मानसिक दबाव के बीच तैयारी करते हैं। ऐसे में जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है, तो मेहनत करने वाले ईमानदार उम्मीदवारों का भरोसा पूरी परीक्षा व्यवस्था से उठने लगता है।
कानून बनने के बावजूद पेपरलीक पर लगाम क्यों नहीं?
विशेषज्ञों के मुताबिक पेपरलीक रोकने के लिए केवल सख्त कानून बना देना ही पर्याप्त नहीं है। कानून का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उसकी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो। कई मामलों में पेपरलीक की जांच लंबी चलती है और दोषियों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इससे अपराधियों के बीच कानून का डर कम हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पेपरलीक के मामलों में केवल निचले स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी है। अक्सर पेपरलीक किसी एक व्यक्ति का काम नहीं होता, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लोगों की मिलीभगत की आशंका रहती है। ऐसे में जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क तक पहुंचकर कार्रवाई करनी होगी।
तकनीकी सुधार को बताया जरूरी
जानकारों के अनुसार परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार भी बेहद जरूरी है। पेपर की छपाई, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की प्रक्रिया में सुरक्षा के कई स्तर होने चाहिए। डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर डेटा सिक्योरिटी सिस्टम के जरिए पेपर की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है।
इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर निगरानी, सीसीटीवी व्यवस्था, बायोमेट्रिक सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। तकनीक का इस्तेमाल केवल परीक्षा के दौरान ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार होने से लेकर परीक्षा खत्म होने तक की पूरी प्रक्रिया में किया जाना चाहिए।
छात्रों के भरोसे का सवाल
पेपरलीक की घटनाएं केवल परीक्षा को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य पर भी असर डालती हैं। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों को दोबारा तैयारी करनी पड़ती है। कई बार परीक्षा की नई तारीख आने में महीनों या वर्षों का समय लग जाता है।




