राजस्थान में पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का सरकार के खिलाफ आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत कर्मचारियों ने गुरुवार को सांभर पंचायत समिति परिसर में अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन करते हुए सद्बुद्धि यज्ञ और हवन का आयोजन किया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार लगातार उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है, जिससे पूरे विभाग में भारी नाराजगी व्याप्त है। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा इसे प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष मुकेश कुमावत ने बताया कि संगठन द्वारा 1 जून से राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है। आंदोलन के तहत विभिन्न चरणों में कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन, कार्य बहिष्कार और पेन डाउन हड़ताल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं। वर्तमान में आंदोलन के तीसरे चरण के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर कर्मचारियों ने पेन डाउन हड़ताल कर सरकारी कामकाज को प्रभावित किया और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्वतंत्र कार्य विभाजन लागू करना, कैडर रिव्यू, नेशनल बेनिफिट, अंतर जिला स्थानांतरण की सुविधा, हार्ड ड्यूटी अलाउंस तथा अतिरिक्त पंचायत भत्ता शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
संगठन के प्रतिनिधि रूपनारायण कुमावत ने कहा कि सद्बुद्धि यज्ञ का उद्देश्य सरकार का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अब भी कर्मचारियों की आवाज नहीं सुनती है तो आंदोलन आर-पार की लड़ाई में बदल सकता है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेशभर के कर्मचारी इस आंदोलन में एकजुट हैं और आने वाले दिनों में आंदोलन का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा।
इस दौरान महामंत्री भागीरथ देवल, रूपनारायण कुमावत, बाबूलाल मीणा, पेमाराम भेटेश्वर, रघुवीर सिंह, शिवानी राजौरा, पूजा आसीवाल, बजरंग आर्य, सुमन कुमावत, ओमप्रकाश मीणा, पिंकी कुमारी मीणा, मन्नालाल, ओमप्रकाश शर्मा, नाथूलाल, भंवरलाल खटीक, सतपाल, पुष्पा चौधरी, अजय गवारिया और मालूराम बलाई सहित बड़ी संख्या में मंत्रालयिक कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें उनका अधिकार और लंबित मांगों का समाधान चाहिए। कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन सड़कों से लेकर पूरे प्रदेश तक व्यापक रूप ले सकता है।




