पाकिस्तान अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार पाकिस्तान नेवी लेजर वेपन सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए वह ऑस्ट्रेलिया और तुर्किए की कंपनियों से संपर्क में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने 4 फरवरी को दो 10 kW लेजर वेपन सिस्टम और संबंधित रडार उपकरणों के लिए टेंडर जारी किया था। इन सिस्टम्स को नौसेना के जहाजों पर तैनात किया जाएगा, ताकि ड्रोन और छोटे हवाई खतरों से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस डील में ऑस्ट्रेलिया की कंपनी Electro Optic Systems (EOS) को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है, जिसने “अपोलो” नामक हाई पावर लेजर सिस्टम विकसित किया है, जिसकी क्षमता 100 kW तक बताई जाती है। वहीं तुर्किए की रक्षा कंपनी ROKETSAN ने “अलका” लेजर सिस्टम तैयार किया है, जो लगभग 2.2 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन को निष्क्रिय करने में सक्षम है।
पाकिस्तान की मांग 20 kW क्षमता वाले लेजर सिस्टम की बताई जा रही है। हालांकि फिलहाल यह प्रक्रिया टेंडर स्तर पर ही है और किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। लेजर वेपन सिस्टम, जिन्हें डायरेक्टेड एनर्जी वेपन भी कहा जाता है, पारंपरिक गोलियों के बजाय उच्च ऊर्जा की किरणों का उपयोग करते हैं, जो दुश्मन के ड्रोन, मिसाइल या छोटे जहाजों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर क्षेत्र में बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए पाकिस्तान इस तकनीक को अपनाने की कोशिश कर रहा है। यदि यह डील पूरी होती है, तो पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में वृद्धि होगी और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है।
भारत के लिए यह एक रणनीतिक चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह रक्षा सौदा किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।




