पाकिस्तान के सामने एक साथ कई बड़ी चुनौतियां
पाकिस्तान की विदेश नीति को लेकर भले ही इस समय कई सकारात्मक दावे किए जा रहे हों, लेकिन देश के अंदर राजनीतिक और सुरक्षा संकट गहराने की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान इस समय बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता जैसे चार बड़े मोर्चों से जूझ रहा है।
एक तरफ पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में हिंसा, विरोध प्रदर्शन और अलगाववादी गतिविधियों की खबरें सामने आ रही हैं।
बलूचिस्तान में BLA और TTP को लेकर बड़ा दावा
बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए लंबे समय से बड़ी सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। रिपोर्ट में BLA और TTP से जुड़े दावों का जिक्र किया गया है, जिनमें क्षेत्र के बड़े हिस्से में अपने प्रभाव की बात कही गई है।
बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठनों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। लगातार होने वाले हमलों और सुरक्षा अभियानों ने इस क्षेत्र को पाकिस्तान की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौतियों में शामिल कर दिया है।
खैबर-पख्तूनख्वा में भी बढ़ा तनाव
दूसरा बड़ा मोर्चा खैबर-पख्तूनख्वा यानी KP है। यहां भी सुरक्षा स्थिति को लेकर पाकिस्तान सरकार और सेना की चिंता बढ़ी हुई है।
क्षेत्र में कबायली समूहों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध और तनाव की खबरें आती रही हैं। इसके अलावा TTP की गतिविधियां भी पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।
PoK में आंदोलन ने बढ़ाई परेशानी
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में भी लंबे समय से आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। बिजली, महंगाई, रोजगार और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों में नाराजगी देखने को मिली है।
रिपोर्ट में PoK के आंदोलन को भी पाकिस्तान के मौजूदा संकट का एक बड़ा हिस्सा बताया गया है। अगर अलग-अलग क्षेत्रों में असंतोष बढ़ता है, तो इसका सीधा असर केंद्र सरकार और सेना की स्थिति पर पड़ सकता है।
गृह मंत्री के बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के सिस्टम को लेकर दिए गए बयान का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। उनके बयान के बाद पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और सरकार की क्षमता को लेकर बहस तेज हो गई है।
हालांकि, किसी भी बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान में सरकार गिरने वाली है या सेना सत्ता पर कब्जा करने जा रही है।




