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पचपहाड़ स्कूल में पेड़ बोलेंगी अपनी कहानी की पहल

पचपहाड़ के महात्मा गांधी स्कूल में ट्री टॉक पहल, 500 पेड़ों पर QR कोड से ऑडियो संदेश, पर्यावरण शिक्षा को रोचक और जीवंत बनाया।

रमेश चंद्र शर्मा30 March 2026
पचपहाड़ स्कूल में पेड़ बोलेंगी अपनी कहानी की पहल

हर पेड़ पर क्यू आर कोड: पचपहाड़ के स्कूल में ट्री टॉक की अनोखी पहल

वर्तमान समय में अब पेड़ सिर्फ छाया ही नहीं देते, वह अपनी कहानी भी सुनाते हैं। भवानी मंडी उपखंड के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में ट्री टॉक – हर पेड़ कुछ कहता है पहल ने पर्यावरण शिक्षा को न केवल जीवंत बनाया बल्कि उसे एक नया और रोचक आयाम भी प्रदान किया है।

विद्यालय परिसर में लगे लगभग 500 पेड़-पौधों पर QR कोड लगाए गए हैं। मोबाइल से इन्हें स्कैन करने पर संबंधित पौधा अपनी विशेषता, उपयोगिता और पर्यावरण के बारे में ऑडियो संदेश के रूप में जानकारी देता है। यह विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए अनोखा और रोचक अनुभव बनता है।

2 वर्ष पूर्व हुई शुरुआत

विद्यालय के प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा के अनुसार, यह परियोजना दो वर्ष पूर्व शुरू की गई थी। शुरुआत में QR कोड स्कैन करने पर केवल PDF जानकारी मिलती थी, लेकिन बाद में इसे अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के लिए ऑडियो आधारित कर दिया गया। अब विद्यार्थी पढ़ने के साथ सुनकर पेड़ों के बारे में जानकारी सीख रहे हैं, जिससे उनकी समझ और स्मरण शक्ति बढ़ रही है।

कलेक्टर्स ट्री बना आकर्षण का केंद्र

जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ की भागीदारी ने इस पहल को अलग पहचान दी। उन्होंने मोरिंगा (सहजन) के पेड़ पर सुरक्षा और पौष्टिक उपयोगिता का संदेश रिकॉर्ड किया। इस पेड़ को “कलेक्टर्स ट्री” का नाम दिया गया है। QR कोड स्कैन करते ही जिला कलेक्टर की आवाज़ में संदेश सुनाई देता है, जो विद्यार्थियों और आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

तकनीकी और शिक्षा का सुंदर संगम

यह पहल लर्निंग बाय डूइंग, experiential learning और ऑडियो लर्निंग जैसे आधुनिक शिक्षण सिद्धांतों पर आधारित है। स्कूल के विद्यार्थियों ने खुद पौधों की जानकारी जुटाई, शोध किया, स्क्रिप्ट तैयार की और रिकॉर्डिंग में भाग लिया। इससे उनकी जिज्ञासा बढ़ रही है और विषय की समझ भी गहरी हो रही है।

अन्य जानकारी और स्थानीय जुड़ाव

परियोजना संयोजक, व्याख्याता डॉ. दिवयेंद्रु सेन के अनुसार, QR कोड स्कैन करते ही ऐसा प्रतीत होता है जैसे पेड़ स्वयं अपनी कहानी सुना रहा हो। कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवीय भाषा में भी हैं, जिससे ग्रामीण और स्थानीय समुदाय भी इस पहल से जुड़ पा रहे हैं।

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विद्यालय परिसर में पीपल, बरगद, नेम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बाबुल, यूकेलिप्टस और मोरिंगा सहित कई प्रजातियों को शामिल किया गया है।


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