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ऑपरेशन सिंदूर स्वदेशी हथियारों से हुआ, एयर मार्शल ने खोले राज

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति, स्वदेशी हथियारों और भारतीय वायुसेना की ताकत से जुड़े कई अहम खुलासे किए।

Enews Bharat7 September 2026
ऑपरेशन सिंदूर स्वदेशी हथियारों से हुआ, एयर मार्शल ने खोले राज

ऑपरेशन सिंदूर: स्वदेशी हथियारों की ताकत पर एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का बड़ा खुलासा

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने कई अहम बातें साझा की हैं। ‘आसमान के रखवाले’ कार्यक्रम में सुरक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़े अनुभवों पर चर्चा करते हुए उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय क्षमताओं और स्वदेशी हथियार प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी क्षमता पर जोर

एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंक के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त रूप से काम किया और वायुसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

जितेंद्र मिश्र ने ऑपरेशन के संदर्भ में बताया कि भारत ने अपनी सैन्य ताकत और स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर भरोसा करते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत लगातार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और घरेलू स्तर पर आधुनिक हथियारों के निर्माण पर जोर दे रहा है।

पश्चिमी वायु कमान की अहम जिम्मेदारी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जितेंद्र मिश्र पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे। पश्चिमी वायु कमान देश के महत्वपूर्ण पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों के हवाई सुरक्षा क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है। इसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और सियाचिन जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं।

उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान की ओर से पैदा होने वाली हवाई और सैन्य चुनौतियों से निपटना था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सटीक रणनीति, आधुनिक तकनीक और एयर डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल ने भारत की सैन्य क्षमता को सामने रखा।

S-400 और ब्रह्मोस जैसे सिस्टम भी रहे चर्चा में

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पिछले खुलासों में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस जैसी भारतीय क्षमताओं का भी उल्लेख सामने आया है। भारत की रक्षा व्यवस्था में लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता और सटीक हमला करने वाली मिसाइल प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

ऑपरेशन के दौरान भारत का उद्देश्य आतंकवादी ठिकानों और सैन्य लक्ष्यों के खिलाफ सटीक कार्रवाई करना था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह अभियान मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था और इसमें भारतीय सेनाओं ने समन्वित तरीके से कार्रवाई की।

आधुनिक युद्ध में सिर्फ हथियार नहीं, रणनीति भी अहम

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े अनुभवों ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में केवल अत्याधुनिक हथियार होना पर्याप्त नहीं है। हथियारों के साथ खुफिया जानकारी, निगरानी, कम्युनिकेशन, एयर डिफेंस, पायलटों की ट्रेनिंग और सही समय पर लिए गए रणनीतिक फैसले भी महत्वपूर्ण होते हैं।

भारतीय वायुसेना की ताकत केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। एयर डिफेंस नेटवर्क, रडार, मिसाइल सिस्टम और विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म मिलकर एक व्यापक सुरक्षा व्यवस्था तैयार करते हैं।

जितेंद्र मिश्र का लंबा सैन्य अनुभव

जितेंद्र मिश्र का भारतीय वायुसेना में लंबा करियर रहा है। वह फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, चीफ टेस्ट पायलट, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट के कमांडेंट और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया है।

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उनका अनुभव टेस्ट पायलट से लेकर उच्च सैन्य कमान तक फैला रहा है। यही वजह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके अनुभव को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी स्वदेशी रक्षा क्षमता की चर्चा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में स्वदेशी रक्षा तकनीक और हथियारों को लेकर चर्चा और तेज हुई। देश पहले से ही ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के तहत घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है।

जितेंद्र मिश्र का बयान इसी व्यापक बदलाव की ओर इशारा करता है कि भविष्य के सैन्य अभियानों में भारत अपनी घरेलू तकनीक, हथियार प्रणालियों और रणनीतिक क्षमताओं का इस्तेमाल और बढ़ा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर क्यों रहा महत्वपूर्ण?

ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ सैन्य प्रतिक्रिया के तौर पर महत्वपूर्ण रहा। इस अभियान में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया और इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की कोशिशें हुईं। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों से निपटने में भूमिका निभाई।

इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय सेना की तीनों सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक युद्ध तकनीक की जरूरत को भी रेखांकित किया।

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के ताजा बयानों से एक बार फिर यह चर्चा सामने आई है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी सैन्य क्षमता, रणनीतिक तैयारी और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों पर किस तरह भरोसा किया। उनके अनुभव आने वाले समय में भारतीय रक्षा नीति और सैन्य आधुनिकीकरण को समझने के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा सकते हैं।


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