52 नए निगरानी सैटेलाइट, 413 ड्रोन हमले नाकाम, राजस्थान सीमा पर स्पेस आधारित सुरक्षा सिस्टम बना भारत की सबसे बड़ी ताकत।
भारत तेजी से अपनी स्पेस आधारित सैन्य क्षमता (Space-Based Surveillance) को मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025 से 2029 के बीच देश SBS-III (Space-Based Surveillance) प्रोग्राम के तहत 52 नए निगरानी सैटेलाइट लॉन्च करेगा। ऑपरेशन सिंदूर, NavIC नेटवर्क और जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की सैन्य रणनीति में अब स्पेस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है।
क्या है जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन?
जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन ऐसी रणनीतिक गाइडलाइन है, जो युद्ध और शांति दोनों परिस्थितियों में थल सेना, नौसेना और वायुसेना को अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का संयुक्त, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग करने का तरीका बताती है।
ऑपरेशन सिंदूर में राजस्थान बना अहम सैन्य मोर्चा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर भारत-पाकिस्तान सीमा के सबसे अहम ऑपरेशनल सेक्टर रहे। पाकिस्तान की ओर से इन इलाकों में 413 ड्रोन हमलों की कोशिश की गई, लेकिन भारतीय सेना ने स्पेस आधारित निगरानी और आधुनिक तकनीक की मदद से अधिकांश हमलों को विफल कर दिया।
सैटेलाइट और ISRO वैज्ञानिकों ने निभाई बड़ी भूमिका
ऑपरेशन के दौरान ISRO के 400 से अधिक वैज्ञानिक और कम से कम 10 रणनीतिक सैटेलाइट चौबीसों घंटे सक्रिय रहे। इन सैटेलाइट्स ने भारतीय सेना को रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सुरक्षित संचार, सटीक लोकेशन और टारगेटिंग सपोर्ट उपलब्ध कराया।
स्पेस आधारित निगरानी के कारण भारतीय सेना दुश्मन के ड्रोन और सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकी और समय रहते जवाबी कार्रवाई कर पाई।
नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध रणनीति रही सफल
ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर पर आधारित था। भारतीय सेना ने सैटेलाइट, NavIC, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम और ग्राउंड रडार से मिली जानकारी को IACCS (Integrated Air Command and Control System) से जोड़ा।
इस तकनीक की मदद से सेना ने सीमा पार बड़ी संख्या में सैनिक भेजने के बजाय सटीक और दूर से हमले करने की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया।
दुश्मन के एयरबेस और आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय सेना ने SkyStriker कामिकेज़ ड्रोन और लंबी दूरी के टोही




