180 छात्रों ने हॉस्टल छोड़ा, खाने में कीड़े और बदहाल सुविधाओं पर फूटा गुस्सा
ओडिशा के नबरंगपुर जिले के झरिगांव ब्लॉक स्थित सांतेमारा सरकारी उच्च विद्यालय के हॉस्टल में छात्रों ने गंभीर अव्यवस्थाओं का आरोप लगाया है। करीब 180 छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल दो कमरों में ठूंसकर रखा गया, खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है और दाल-चावल में कीड़े तक मिल रहे हैं। हालात से परेशान होकर कई छात्र अपना सामान लेकर हॉस्टल छोड़कर अपने गांवों की ओर पैदल निकल पड़े।
छात्रों ने हॉस्टल की बदहाल स्थिति पर जताई नाराजगी
छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में रहने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। करीब 180 छात्रों को मात्र दो कमरों में रखा जा रहा था, जिससे भीड़भाड़ के कारण पढ़ाई और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे थे। छात्रों का कहना है कि उन्हें कई दिनों से खराब भोजन परोसा जा रहा था और दाल-चावल में कीड़े मिलने की शिकायत भी कई बार की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
छत से टपकता पानी, गंदे टॉयलेट और पानी की समस्या
छात्रों ने बताया कि हॉस्टल की छत से बारिश का पानी टपकता है। शौचालयों की सफाई नहीं होती और पीने के पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा खेल सामग्री की कमी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव से भी छात्र लंबे समय से परेशान थे।
12 किलोमीटर पैदल चलकर गांव लौटे छात्र
लगातार समस्याओं से नाराज होकर कई छात्र अपना बैग लेकर हॉस्टल छोड़कर निकल पड़े। छात्रों ने अपने गांव तक पहुंचने के लिए करीब 12 किलोमीटर का सफर पैदल तय किया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अधिकारियों ने पहुंचकर छात्रों और अभिभावकों को समझाया
घटना की सूचना मिलने के बाद शिक्षा एवं जनजातीय कल्याण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों और उनके अभिभावकों से बातचीत कर समस्याओं के जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
असिस्टेंट ब्लॉक ऑफिसर दशरथ गोंड ने बताया कि सूचना मिलते ही अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को रास्ते में रोककर दुकलपाड़ा स्कूल में ठहराया, जहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था भी कराई गई।
स्कूल प्रिंसिपल ने अधिकांश आरोपों से किया इनकार
स्कूल की प्रिंसिपल राजलक्ष्मी महाराणा ने छात्रों द्वारा लगाए गए अधिकांश आरोपों को खारिज किया। हालांकि उन्होंने हॉस्टल में कुछ व्यवस्थागत कमियों को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि छात्रों को सड़ा हुआ दाल-चावल परोसा जाता है।




