केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पूर्वोत्तर भारत के विकास और शांति प्रक्रिया को लेकर दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) हटा लिया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में लगातार सुधार हुआ है और AFSPA के दायरे में लगातार कमी इस बात का संकेत है कि पूर्वोत्तर में शांति और स्थिरता लौट रही है।
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता पूर्वोत्तर राज्यों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से क्षेत्र में उग्रवाद से जुड़ी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इसी कारण अब AFSPA को चरणबद्ध तरीके से हटाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
गृह मंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच सीमा विवाद वाले क्षेत्र में लंबे समय से बंद पड़े तेल और गैस उत्पादन को दोबारा शुरू करने पर सहमति बन गई है। यह फैसला दोनों राज्यों के बीच सहयोग और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
अमित शाह के अनुसार, इस समझौते के बाद क्षेत्र की तेल उत्पादन क्षमता में लगभग 10 गुना वृद्धि हो सकती है। वर्तमान में जहां प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,500 बैरल तेल का उत्पादन हो रहा है, वहीं उत्पादन बढ़कर करीब 10,000 से 15,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बताया कि संबंधित तेल क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के तेल और गैस भंडार होने का अनुमान है। उत्पादन शुरू होने से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। साथ ही क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AFSPA में कमी और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, दोनों कदम पूर्वोत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा, आधारभूत संरचना का विकास होगा और स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।




