नेपाल के Gen-Z आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। सितंबर 2025 में शुरू हुआ यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन के विरोध तक सीमित नहीं रहा था, बल्कि भ्रष्टाचार, जवाबदेही, शासन व्यवस्था और राजनीतिक बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया था। आंदोलन ने नेपाल की राजनीति को ऐसा झटका दिया कि तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा और देश में अंतरिम सरकार का रास्ता खुला।
लेकिन आंदोलन के एक साल बाद सवाल यह है कि क्या Gen-Z युवाओं ने जिस बदलाव की उम्मीद की थी, वह वास्तव में जमीन पर दिखाई दे रहा है?
आंदोलन के बाद बदली नेपाल की राजनीति
2025 के सितंबर में युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों ने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी। शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध से हुई, लेकिन जल्द ही प्रदर्शन भ्रष्टाचार, राजनीतिक जवाबदेही और व्यवस्था में बदलाव की बड़ी मांग में बदल गया।
प्रदर्शन इतना बड़ा हुआ कि तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। इस सरकार के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी राजनीतिक स्थिरता बहाल करने और नए चुनाव कराने की थी।
एक साल बाद भी प्रदर्शनकारियों के सामने कानूनी मामले
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और सरकारी तथा निजी संपत्तियों को हुए नुकसान के बाद कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी शुरू हुई।
आज, आंदोलन की पहली बरसी के मौके पर Gen-Z से जुड़े लोगों के बीच यह चिंता बनी हुई है कि आंदोलन में शामिल युवाओं को अब भी मुकदमों और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी वजह से आंदोलन से जुड़े लोग सरकार से जवाबदेही और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुरानी और मौजूदा सरकार में कितना अंतर?
Gen-Z आंदोलन का एक बड़ा मुद्दा यह था कि देश की राजनीति में लंबे समय से चले आ रहे तौर-तरीकों को बदला जाए। युवाओं का सवाल था कि सरकारें बदलने के बावजूद भ्रष्टाचार, जवाबदेही और सुशासन जैसी समस्याएं क्यों बनी रहती हैं।
2026 के चुनाव के बाद नई राजनीतिक ताकत राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बहुमत के साथ सत्ता में आई और बालेन्द्र शाह यानी बालेन शाह प्रधानमंत्री बने। यह बदलाव खुद Gen-Z आंदोलन के बाद बने नए राजनीतिक माहौल का बड़ा परिणाम माना गया।
लेकिन नई सरकार के सामने भी वही चुनौती है—क्या वह उस सिस्टम को बदल पाएगी, जिसके खिलाफ युवा सड़कों पर उतरे थे?
नई सरकार के सामने बड़ी परीक्षा
बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार को युवाओं से बड़ी उम्मीदें मिली हैं। चुनाव में RSP की शानदार जीत के बाद उसके सामने जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है।
सरकार के सामने भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, पारदर्शिता बढ़ाने, रोजगार के अवसर पैदा करने और प्रशासन को बेहतर बनाने जैसी कई चुनौतियां हैं। साथ ही आंदोलन से जुड़े कानूनी मामलों को लेकर भी सरकार से निष्पक्षता की उम्मीद की जा रही है।



