नेपाल में बाढ़ के बाद फिर मंडराया नया खतरा
काठमांडू। नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ से मची तबाही के बीच अब बर्फीली चट्टानों के खिसकने से दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पिछले सात दिनों में प्राकृतिक आपदा से 1127 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 4600 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं।
आपदा के कारण कई इलाकों में सड़कें, पुल और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना बनी हुई है।
बर्फीली चट्टानों के खिसकने से बढ़ी चिंता
बाढ़ के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ और चट्टानों के खिसकने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों की निगाह संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों पर बनी हुई है। यदि बड़े पैमाने पर बर्फ या चट्टानों का मलबा नीचे आता है, तो निचले इलाकों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से लोगों को संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने और संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
हजारों लोगों का अब तक पता नहीं
नेपाल में जारी राहत एवं बचाव अभियान के दौरान हजारों लोगों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। बचाव दल मलबे, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। खराब मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत कार्यों में भी कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
एक लड़की ने खोए 17 रिश्तेदार
इस प्राकृतिक आपदा ने कई परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार, एक लड़की ने बाढ़ की इस त्रासदी में अपने 17 रिश्तेदारों को खो दिया। ऐसी घटनाएं आपदा की भयावहता और प्रभावित परिवारों के दर्द को सामने लाती हैं।
भारत और अन्य देशों के नागरिकों की भी तलाश
बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल में फंसे या लापता विदेशी नागरिकों को लेकर भी तलाश अभियान जारी है। भारतीय और चीनी नागरिकों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। राहत एजेंसियां स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लापता लोगों की पहचान और उनके सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।



