नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई भारत की चिंता, चीन के मेडोग प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने सिर्फ नेपाल ही नहीं, बल्कि भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। घर, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं पानी और मलबे में बह गए हैं। सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों के बीच अब इस आपदा को लेकर चीन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि चीन की तरफ से समय रहते जरूरी जानकारी नहीं दी गई। इसी बीच भारत में चीन के मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को लेकर पुरानी चिंताएं फिर चर्चा में आ गई हैं।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। तिब्बत के पहाड़ी इलाके से निकलने वाली यह नदी नेपाल में प्रवेश करने के बाद कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर गुजरती है। तेज बहाव के कारण घर, वाहन, सड़कें और बिजली से जुड़े ढांचे तक बह गए।
नेपाल में इस आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें विदेशी नागरिक और भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव दल खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के बीच लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं।
नेपाल ने चीन पर लगाए गंभीर आरोप
नेपाल की ओर से दावा किया गया है कि चीन के केरुंग क्षेत्र में एक झील टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी नेपाल की तरफ आया। आरोप है कि अगर चीन की ओर से पहले ही इसकी जानकारी और अलर्ट दिया जाता तो नेपाल प्रशासन समय रहते संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा सकता था।
हालांकि, बाढ़ के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम वैज्ञानिक निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है। विशेषज्ञों की ओर से भूस्खलन, बर्फ और चट्टानों के गिरने तथा प्राकृतिक जल अवरोध टूटने जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा की जा रही है।
चीन का मेडोग प्रोजेक्ट क्यों बना भारत की चिंता?
नेपाल की घटना के बाद अब चीन के उस विशाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की चर्चा फिर शुरू हो गई है, जो भारत की सीमा के करीब तिब्बत में बनाया जा रहा है। इसे मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट कहा जाता है।
यह परियोजना यारलुंग त्सांगपो नदी पर प्रस्तावित है। यही नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र के नाम से जानी जाती है। इसलिए नदी के ऊपरी हिस्से में चीन की किसी बड़ी परियोजना का असर भारत में पानी के प्रवाह पर पड़ने की आशंका जताई जाती रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना में नदी के बड़े मोड़ वाले क्षेत्र में कई बांधों के जरिए बिजली उत्पादन की योजना है। इसकी प्रस्तावित क्षमता करीब 60 गीगावाट बताई जाती है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल हो सकती है।
भूकंप और भूस्खलन को लेकर भी चिंता
मेडोग क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में आता है। विशेषज्ञों की चिंता केवल बांध के टूटने को लेकर नहीं है। बड़े भूकंप की स्थिति में आसपास के पहाड़ों में भूस्खलन, चट्टानों के गिरने और मलबे के नदी में पहुंचने का खतरा भी रहता है।
ऐसी स्थिति में नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है। अचानक पानी बढ़ने या नदी में अस्थायी अवरोध बनने से नीचे की ओर रहने वाले इलाकों के लिए खतरा बढ़ सकता है।



