देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG को लेकर बड़ा बदलाव होने वाला है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के DG ने संकेत दिया है कि NEET को जल्द ही पेपर-पेन मोड से हटाकर कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मोड में कराया जा सकता है। NTA के मुताबिक यह परीक्षा व्यवस्था का भविष्य है और इसे लागू करने की दिशा में काम चल रहा है।
इसके साथ ही परीक्षा में नकल और दूसरी गड़बड़ियों को रोकने के लिए Artificial Intelligence यानी AI का इस्तेमाल करने पर भी काम जारी है। इसका मकसद परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक के हिसाब से मजबूत बनाना है।
NEET अब कंप्यूटर पर देने की तैयारी
अभी NEET-UG परीक्षा मुख्य रूप से ऑफलाइन यानी पेपर-पेन मोड में आयोजित होती है। इसमें लाखों छात्र एक ही परीक्षा में शामिल होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करना, पेपर की सुरक्षा बनाए रखना, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और पूरी प्रक्रिया को संभालना NTA के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।
अब NTA NEET को कंप्यूटर पर कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। NTA DG ने बताया है कि NEET को बहुत जल्द कंप्यूटर-बेस्ड मोड में ले जाया जा सकता है। हालांकि, बदलाव किस साल से और किस तरीके से लागू होगा, इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक परीक्षा नोटिफिकेशन में स्पष्ट होगी।
JEE और SSC की तरह होगा कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम
कंप्यूटर पर परीक्षा देना छात्रों के लिए बिल्कुल नया तरीका नहीं है। JEE Main पहले से ही कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षा के तौर पर आयोजित होता है। इसी तरह SSC की कई परीक्षाएं भी कंप्यूटर-बेस्ड मोड में होती हैं।
ऐसे में NEET को CBT मोड में लाने का मतलब होगा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी उसी डिजिटल परीक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन जाएगी, जिसका इस्तेमाल देश की कई दूसरी बड़ी परीक्षाओं में पहले से किया जा रहा है।
AI से नकल रोकने की तैयारी
NEET को कंप्यूटर पर कराने के साथ परीक्षा की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। NTA AI तकनीक का इस्तेमाल करके नकल और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने की संभावनाओं पर काम कर रहा है।
AI की मदद से परीक्षा केंद्रों की निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने जैसे विकल्पों पर काम किया जा सकता है। हालांकि, AI के इस्तेमाल का अंतिम तरीका और उसका दायरा NTA की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा देने वाला हर छात्र समान परिस्थितियों में परीक्षा दे और किसी तरह की अनुचित मदद या नकल की गुंजाइश कम से कम हो।
पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं के बाद बढ़ी जरूरत
NEET जैसी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं। इसलिए परीक्षा से जुड़ी छोटी सी गड़बड़ी का असर बहुत बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पेपर लीक को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
इसी वजह से परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा सुरक्षित बनाने की मांग भी बढ़ी है। कंप्यूटर-बेस्ड परीक्षा और AI जैसी तकनीकों को इसी दिशा में संभावित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।



