दो-तिहाई बहुमत की तैयारी में एनडीए, विपक्षी दलों में सेंध लगाने की रणनीति पर फोकस
केंद्र की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लक्ष्य के साथ नई राजनीतिक रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का 'मिशन 360' केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला आरक्षण, परिसीमन, 'एक देश-एक चुनाव' और न्यायिक सुधारों जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विधेयकों को पारित कराने की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
हाल ही में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद पार्टी ने लोकसभा का गणित मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है।
लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का गणित
लोकसभा में संविधान संशोधन पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। मौजूदा स्थिति में एनडीए इस आंकड़े से अभी भी 41 सांसद दूर बताया जा रहा है। ऐसे में भाजपा नए सहयोगियों को साथ लाने, विपक्षी दलों में टूट की संभावना तलाशने और जरूरत पड़ने पर विपक्षी सांसदों की अनुपस्थिति जैसी संभावनाओं पर भी विचार कर रही है।
किन दलों पर है नजर?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा की नजर अब समाजवादी पार्टी (सपा), डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों पर है। हालांकि इन दावों की किसी भी संबंधित दल ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
महाराष्ट्र की राजनीति में भी एनसीपी (शरद गुट) के भविष्य को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कांग्रेस और एनडीए दोनों के साथ संभावित बातचीत की बात कही जा रही है, लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
विपक्ष की गैरहाजिरी भी हो सकती है रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष के कुछ सांसद महत्वपूर्ण मतदान के दौरान सदन में मौजूद नहीं रहते हैं, तो प्रभावी सदस्य संख्या कम होने से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी बदल सकता है। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों और सांसदों की मौजूदगी पर निर्भर करेगा।




