मिशन-360 क्या है? जानिए मोदी सरकार की नई रणनीति
मानसून सत्र से पहले सरकार की बड़ी रणनीति
संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी राजनीतिक रणनीति को और अधिक आक्रामक बना दिया है। सरकार ने 'मिशन-360' के तहत सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों, विशेष रूप से महिला आरक्षण बिल और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े प्रस्तावों, पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना है।
सरकार का मानना है कि आने वाले समय में देश की चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े बड़े फैसलों के लिए सभी दलों का सहयोग आवश्यक होगा। इसी वजह से सरकार विपक्षी दलों के साथ संवाद बढ़ाने और संसद में आवश्यक समर्थन जुटाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
महिला आरक्षण बिल सरकार की प्राथमिकता
महिला आरक्षण बिल लंबे समय से भारतीय राजनीति का एक अहम मुद्दा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
हालांकि इस बिल के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर परिसीमन प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में सरकार चाहती है कि संबंधित सभी संवैधानिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों और राजनीतिक स्तर पर किसी प्रकार का गतिरोध न रहे।
परिसीमन बिल पर भी रहेगा विशेष फोकस
परिसीमन का संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के पुनर्गठन से है। जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सरकार का मानना है कि भविष्य में होने वाले चुनावों को अधिक संतुलित और प्रतिनिधिक बनाने के लिए परिसीमन प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है।
चूंकि यह विषय सीधे संविधान और चुनावी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे लागू करने के लिए संसद में व्यापक सहमति और आवश्यक बहुमत की जरूरत पड़ सकती है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाने की तैयारी
सरकार की सबसे बड़ी चुनौती संसद में आवश्यक संख्या बल सुनिश्चित करना है। संवैधानिक संशोधन से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी कारण बीजेपी ने मिशन-360 के तहत सहयोगी दलों के अलावा अन्य राजनीतिक दलों से भी संपर्क बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
सूत्रों के अनुसार सरकार चाहती है कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर राजनीतिक टकराव के बजाय सहमति का माहौल बने। इसके लिए संसद सत्र शुरू होने से पहले सभी दलों के साथ संवाद और चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
विपक्ष की भूमिका भी होगी अहम
महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे केवल सरकार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर पूरे राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ सकता है। इसलिए विपक्ष की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




