सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिया जाने वाला मिड डे मील उनकी पढ़ाई के साथ-साथ पोषण का भी एक अहम हिस्सा है। लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर इस खाने की गुणवत्ता को लेकर ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं, जो व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। कहीं खाने में कीड़े मिलने की शिकायत होती है, तो कहीं सड़ी हुई सब्जियां या खराब सामान इस्तेमाल किए जाने के आरोप लगते हैं।
अब एक बार फिर मिड डे मील की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अलग-अलग राज्यों से सामने आए मामलों में छात्रों और स्कूलों से जुड़ी शिकायतों ने यह चिंता बढ़ाई है कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की जांच और निगरानी कितनी प्रभावी है।
कहीं खाने में मिले कीड़े
बिहार के अरवल जिले में अगस्त 2026 में मिड डे मील में कीड़े मिलने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सदर ब्लॉक के 75 स्कूलों में सप्लाई किए गए सोयाबीन के व्यंजन में कीड़े पाए जाने की शिकायत हुई थी। स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने खाना बच्चों को परोसने से रोक दिया और शिक्षा विभाग को मामले की जानकारी दी। विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।
ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर भोजन बच्चों को परोसने से पहले ही उसमें कीड़े नजर आ जाते हैं, तो खाने की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हो रही थी।
कहीं सड़ी सब्जियों को लेकर शिकायत
मिड डे मील को लेकर पहले भी अलग-अलग राज्यों से खराब भोजन की शिकायतें आती रही हैं। तेलंगाना के मेरपेट में एक छात्र ने सरकारी स्कूल के मिड डे मील में कीड़े और पत्थर मिलने की शिकायत की थी। शिकायत के बाद पुलिस ने स्कूल पहुंचकर जांच की थी, जहां कथित तौर पर सड़ी सब्जियां, खराब तेल और कीड़े वाला चावल मिलने की बात सामने आई थी।
ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि भोजन तैयार करने के दौरान इस्तेमाल होने वाले राशन और सब्जियों की गुणवत्ता की नियमित जांच आखिर किस तरह की जाती है।
छात्रों को शिकायत करने पर डराने का आरोप
मिड डे मील की गुणवत्ता खराब होने की शिकायतों के साथ एक और गंभीर बात सामने आती है। कुछ मामलों में छात्रों या अभिभावकों की ओर से आरोप लगाए गए कि शिकायत करने पर उन्हें कार्रवाई की धमकी दी गई।
मेरपेट के मामले में छात्र ने आरोप लगाया था कि मिड डे मील को लेकर बार-बार शिकायत करने पर उसे स्कूल से ट्रांसफर सर्टिफिकेट यानी TC देने की धमकी दी गई।
अगर कोई छात्र खाने में खराबी की शिकायत करता है, तो उसका उद्देश्य अपनी और बाकी बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखना होता है। ऐसे में शिकायत को दबाने के बजाय उसकी जांच करना जरूरी है।
'शिकायत की तो केस कर देंगे' का आरोप
मौजूदा मामले में भी छात्रों की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि शिकायत करने पर प्रिंसिपल की ओर से केस करने की धमकी दी जाती है। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। लेकिन अगर किसी स्कूल में बच्चों को खराब भोजन के बारे में बोलने से डराया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
स्कूल में बच्चों को अपनी परेशानी बताने के लिए सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। अगर खाना खराब है तो बच्चे या शिक्षक उसकी शिकायत कर सकें और संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर सकें, यही व्यवस्था का उद्देश्य होना चाहिए।
राजस्थान में भी मिड डे मील को लेकर मामला आया सामने
राजस्थान के कोटा में अगस्त 2026 में मिड डे मील खाने के बाद कई बच्चों की तबीयत खराब होने की खबर सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 27 बच्चे बीमार पड़े और 21 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।



