MBBS सीट दिलाने के नाम पर करोड़ों की डील का आरोप
बिहार में MBBS एडमिशन के नाम पर कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एजेंट NEET रैंक कम होने के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट दिलाने का दावा कर रहे थे। इसके लिए छात्रों और उनके परिजनों से करोड़ों रुपये की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ एजेंटों ने कथित तौर पर छात्रों को भरोसा दिलाया कि NEET में रैंक चाहे जैसी हो, वे पश्चिम बंगाल और राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिला सकते हैं। इसके लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये तक की डील की बात सामने आई है।
NRI कोटे के नाम पर फर्जी दस्तावेजों का आरोप
मामले में NRI कोटे के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। प्रवर्तन निदेशालय की एक आधिकारिक जांच में पहले ऐसे मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें NRI कोटे के तहत मेडिकल एडमिशन के लिए कथित तौर पर फर्जी NRI दस्तावेज तैयार किए गए। जांच के अनुसार, कुछ मामलों में एजेंटों और मेडिकल कॉलेजों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाने और MBBS सीट के लिए करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये तक शुल्क लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
ऐसे मामलों में कथित तौर पर वास्तविक NRI प्रायोजक की जगह असंबंधित लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी। इससे मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा होती है।
NEET रैंक को लेकर एजेंटों के बड़े दावे
आरोप है कि एजेंट छात्रों और अभिभावकों को यह भरोसा दिला रहे थे कि NEET में अपेक्षित रैंक नहीं होने के बावजूद वे मेडिकल कॉलेज में सीट की व्यवस्था कर सकते हैं। एडमिशन के लिए मोटी रकम की मांग की जाती थी।
हालांकि, मेडिकल एडमिशन में किसी भी तरह के ‘गारंटीड एडमिशन’ या NEET मेरिट को दरकिनार कर सीट दिलाने के दावे को लेकर छात्रों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। राजस्थान में भी उपलब्ध जानकारी के अनुसार सरकारी मेडिकल कॉलेजों की MBBS सीटें NEET मेरिट और निर्धारित काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए भरी जाती हैं।
करोड़ों रुपये देकर भी फंस सकते हैं छात्र
MBBS में प्रवेश की चाह रखने वाले छात्रों और उनके परिवारों को ऐसे एजेंटों से सतर्क रहने की जरूरत है, जो कम NEET स्कोर या खराब रैंक के बावजूद सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने का दावा करते हैं।
किसी भी एडमिशन के लिए संबंधित राज्य की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया, मेडिकल कॉलेज और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से जुड़े आधिकारिक नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। बिना सत्यापन के किसी एजेंट को करोड़ों रुपये देना छात्रों और अभिभावकों के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।



