मांगरोल क्षेत्र के पाडलिया गांव में जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे न केवल ग्रामीण बल्कि पशु भी प्यासे रहने को मजबूर हैं। सरकार की ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना कागजों में तो सफल नजर आती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
सायगढ़ पेयजल परियोजना के तहत गांव में नल कनेक्शन तो दिए गए, लेकिन पिछले चार से पांच वर्षों से इन नलों में पानी नहीं आ रहा है। इसके चलते ग्रामीणों को निजी नलकूपों और सार्वजनिक हैंडपंपों के फ्लोराइड युक्त पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
पानी की कमी का सबसे ज्यादा असर पशुओं पर पड़ रहा है। गांव में पशुओं के लिए बनी खेळ (जलाशय) में भी लंबे समय से पानी नहीं भरा गया है, जिससे मवेशियों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे खुद निजी नलकूपों से पाइपलाइन के जरिए खेळ में पानी भरने का प्रयास कर रहे हैं।
पशुपालकों का कहना है कि बाणगंगा नदी में भी जल प्रवाह नहीं है और मवेशियों के उतरने के लिए केटल रैंप की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में पशुओं को पानी पिलाना बड़ी चुनौती बन गया है, जबकि आवारा पशु तो और भी ज्यादा परेशान हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सायगढ़ पेयजल योजना के तहत नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, खेळ में पानी भरवाया जाए और बाणगंगा नदी में केटल रैंप का निर्माण किया जाए, ताकि पशुओं को पर्याप्त पानी मिल सके।
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