कस्बे में नगरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से संचालित सिंघोला पेयजल योजना इन दिनों तकनीकी खामियों के कारण प्रभावित होती नजर आ रही है। वर्ष 2016 से पार्वती नदी स्थित सिंघोला दह से फिल्टर प्लांट के माध्यम से शुद्ध पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी, लेकिन मोटर खराब होने से योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर असर पड़ा है।
जानकारी के अनुसार जलदाय विभाग के फिल्टर प्लांट में लगी पांच मोटरों में से वर्तमान में केवल एक मोटर ही संचालित हो रही है, जबकि शेष मोटर लंबे समय से खराब पड़ी हुई हैं। वहीं सिंघोला दह पर भी तीन बड़ी मोटरों की जगह एक छोटी मोटर से पानी उठाया जा रहा है, जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में कच्चा पानी फिल्टर प्लांट तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इस कमी को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा प्लांट में तीन ट्यूबवेल का पानी भरकर फिल्टर प्रक्रिया चलाने की व्यवस्था की जा रही है। परिणामस्वरूप नगर की पाइपलाइन से घरों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नलों में आ रहे पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक प्रतीत हो रही है, जिससे साबुन ठीक से झाग नहीं बनता, कपड़े धोने में कठिनाई होती है और दाल तक आसानी से नहीं गलती।
जब इस समस्या की जानकारी पत्रकारों को दी गई तो वे कस्बेवासियों के साथ जलदाय विभाग कार्यालय पहुंचे, जहां जांच के दौरान फिल्टर प्लांट की मोटर बंद पाई गई। कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि मोटर लंबे समय से खराब है और इसकी सूचना संबंधित ठेकेदार को दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक मरम्मत का कार्य नहीं हो सका है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार मजबूरी में ट्यूबवेल का पानी मिक्स कर नगर में सप्लाई दी जा रही है। ऐसे में लोगों को शुद्ध फिल्टर पानी की बजाय मिश्रित पानी मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
नगरवासियों ने विभाग से जल्द मोटरों की मरम्मत कर शुद्ध पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की है, ताकि योजना का मूल उद्देश्य पूरा हो सके और लोगों को सुरक्षित व स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जा सके।




