मातमी धुनों, अखाड़ों और छबील सेवा के बीच इमाम हुसैन को किया याद
मांगरोल में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम की दसवीं पर ताजिया जुलूस शांतिपूर्ण एवं धार्मिक आस्था के साथ निकाला गया। मातमी धुनों और "नारा-ए-तकबीर" के नारों के बीच मुस्लिम समाज के लोगों ने इमाम हुसैन को श्रद्धापूर्वक याद किया।
लाइसेंसधारी सलाम पठान ने बताया कि गुरुवार रात और शुक्रवार दिन में ताजिए निकाले गए। पहला ताजिया इमामबाड़ा मस्जिद से सिपाही मोहल्ला, तहसील रोड और मुख्य बाजार होते हुए निकला, जहां अली अखाड़ा समिति ने पारंपरिक अखाड़ा प्रदर्शन किया। दूसरा ताजिया जामा मस्जिद से अलाव चौक होते हुए कर्बला मैदान पहुंचा, जहां कलंदरी अखाड़ा समिति ने भी पारंपरिक करतब प्रस्तुत किए।
दोनों ताजिए रंगबाड़ी बालाजी मंदिर के सामने से गुजरते हुए करीमनगर पहुंचे, जहां बाणगंगा नदी में उन्हें ठंडा किया गया। वहीं सीसवाली में भी ताजिया जुलूस शांतिपूर्वक निकाला गया और डिबरी कालीसिंध नदी में ताजियों का विसर्जन किया गया।
जुलूस के दौरान मांगरोल तहसीलदार बृजेश सिहरा, थाना प्रभारी विनोद कुमार मीणा तथा पुलिस बल पूरी व्यवस्था के साथ मौजूद रहा। अली अखाड़ा समिति एवं कलंदरी अखाड़ा समिति ने प्रशासन का माला पहनाकर सम्मान भी किया।
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए छबील लगाकर शरबत एवं दूध का वितरण किया गया। युवाओं ने पारंपरिक अखाड़ा प्रदर्शन किया, जबकि बच्चे और युवा आलम लेकर इमाम हुसैन की शान में नारे लगाते हुए चल रहे थे। पूरे आयोजन के दौरान धार्मिक सौहार्द, अनुशासन और भाईचारे का वातावरण देखने को मिला।




