श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस शनिवार को भटवाड़ा में श्रद्धालुओं की उपस्थिति उमड़ पड़ी। कथा वाचक प्रमोद शास्त्री ने इस दिन भक्त ध्रुव के चरित्र का वर्णन किया।
कथा के अनुसार, राजा उत्तानपाद की छोटी रानी सुरुचि ने बालक ध्रुव को अपने पुत्र उत्तम की तरह राजा की गोद में बैठने से रोका और अपमानित किया। दुखी ध्रुव ने ईश्वर की शरण ली। ध्रुव की माँ सुनीति ने उन्हें समझाया कि केवल भगवान नारायण ही दुखों को दूर कर सकते हैं।
वन में जाते समय नारद जी ने ध्रुव की परीक्षा ली और उन्हें 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उपदेश दिया। 5 वर्ष के ध्रुव ने निराहार और कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने दर्शन दिए और उन्हें ध्रुव तारे के रूप में अटल पद प्रदान किया।
कथा का संदेश यह है कि अटूट विश्वास और दृढ़ निश्चय से भगवान की प्राप्ति संभव है। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ कथा का लाभ लिया और भगवान विष्णु की महिमा का अनुभव किया।
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