अविकानगर स्थित संस्थान द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के फ्लैगशिप कार्यक्रम “मेरा गांव मेरा गौरव” के तहत मालपुरा तहसील के दड़ावट गांव में एक महत्वपूर्ण पशु स्वास्थ्य शिविर और किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ, जिसमें किसानों को आधुनिक कृषि और पशुपालन की वैज्ञानिक तकनीकों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग, उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की सही मात्रा, फसल के अनुरूप सिंचाई प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशेष रूप से हरी खाद के उपयोग पर जोर देते हुए बताया गया कि ढैंचा, ग्वार, लोबिया और मूंग जैसी दलहनी फसलों को 25–30 दिन बाद खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उत्पादन बेहतर होता है।
डॉ. रंगलाल मीना ने समेकित पोषण और कीट प्रबंधन के माध्यम से फसलों की सुरक्षा और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय बताए, जबकि श्री सीताराम मीना ने हरी खाद के वैज्ञानिक उपयोग की विधियां समझाईं। कार्यक्रम में डॉ. अमर सिंह मीना, श्री गौतम चोपड़ा और पशुधन सहायकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
पशु स्वास्थ्य शिविर के दौरान कुल 490 पशुओं का उपचार किया गया, जिसमें 150 भेड़, 213 बकरियां, 12 गाय और 15 भैंस शामिल रहीं। पशु चिकित्सक डॉ. सृष्टि सोनी ने सभी पशुओं का इलाज कर निःशुल्क दवाइयां वितरित कीं। इस शिविर में दड़ावट गांव के 74 किसानों ने भाग लेकर लाभ उठाया।
कार्यक्रम में पशु आनुवंशिकी एवं प्रजनन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा ने उन्नत नस्लों और संतुलित पशु आहार के महत्व पर किसानों को जागरूक किया।
इसी कड़ी में काड़ीला गांव में रात्रि चौपाल का आयोजन भी किया गया, जिसमें 80 किसानों ने भाग लिया। यहां वैज्ञानिकों ने ग्रामीणों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान किया और कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तरी के विजेताओं को सम्मानित किया गया।




