मकराना में इस बार पुष्पक विमान पर सवार नजर आएगा रावण
राजस्थान की मार्बल नगरी मकराना में इस बार दशहरा महोत्सव खास और अनोखे अंदाज में मनाया जाएगा। विजयादशमी के अवसर पर यहां 80 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इस बार रावण किसी हाथी या रथ पर नहीं, बल्कि विशालकाय पुष्पक विमान पर सवार नजर आएगा। रावण के इस अनोखे स्वरूप को देखने के लिए लोगों में खास उत्साह रहने की उम्मीद है।
मकराना में दशहरा महोत्सव की परंपरा काफी पुरानी है। यहां साल 1919 से हर वर्ष रावण दहन का आयोजन किया जा रहा है। समय के साथ इस आयोजन में कई बदलाव हुए हैं, लेकिन इस बार पुतले की ऊंचाई बढ़ाने और पुष्पक विमान पर रावण को विराजमान करने की तैयारी इसे खास बना रही है।
चारभुजा सेवा समिति की देखरेख में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर दशहरा मैदान और पुतला निर्माण स्थल पर तैयारियां तेजी से चल रही हैं। समिति के पदाधिकारी और स्थानीय कलाकार आयोजन को भव्य बनाने में जुटे हुए हैं।
पहली बार 80 फीट ऊंचा बनाया जा रहा रावण का पुतला
मकराना में अब तक करीब 75 फीट ऊंचे रावण के पुतले का निर्माण किया जाता था। लेकिन इस बार आयोजन को पहले से अधिक भव्य बनाने के उद्देश्य से पुतले की ऊंचाई बढ़ाकर 80 फीट कर दी गई है। समिति के अनुसार, लंबे समय से चली आ रही परंपरा में पहली बार पुतले की ऊंचाई में इतनी बढ़ोतरी की गई है।
चारभुजा सेवा समिति के संरक्षक ठाकुर चंद्रवीर सिंह चौहान और समिति सचिव एवं स्थानीय पार्षद महेश पुजारी ने बताया कि इस बार रावण दहन को यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारी की जा रही है।
पुष्पक विमान पर सवार रावण का स्वरूप इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगा। पहले कभी हाथी तो कभी रथ पर रावण के पुतले को विराजमान किया जाता रहा है, लेकिन इस बार पुष्पक विमान के जरिए दर्शकों को एक अलग नजारा देखने को मिलेगा।
50 स्थानीय कारीगर 25 दिनों से कर रहे मेहनत
इस विशालकाय रावण के पुतले और पुष्पक विमान को तैयार करने के लिए मकराना के स्थानीय कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। खास बात यह है कि इसके निर्माण के लिए बाहर से किसी विशेष टीम को नहीं बुलाया गया है। शहर के करीब 50 स्थानीय कारीगर और कलाकार पिछले 25 दिनों से इस काम में जुटे हुए हैं।
कारीगर अपने हुनर और अनुभव के दम पर रावण के पुतले को आकर्षक स्वरूप देने में लगे हैं। पुष्पक विमान की बनावट से लेकर रावण के विशाल आकार तक, निर्माण के हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर इतने बड़े आयोजन की तैयारी में कारीगरों की भागीदारी मकराना की प्रतिभा को भी सामने लाती है। यह पहल स्थानीय हुनर को बढ़ावा देने के साथ 'लोकल फॉर वोकल' की भावना को भी मजबूत करती है।
इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर मिल रहा है। साथ ही शहर की पुरानी परंपरा को नए अंदाज में आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है।



