मकराना शहर में अनुसूचित जाति के मेघवाल समाज परिवार ने मृत्यु भोज बंद कर ओर बारह दिन की जगह सिर्फ सात दिन का शोक रखने का निर्णय लेकर समाज के लोगों में फिजूल खर्ची बंद करने, सामाजिक कुरीतियों को मिटाने ओर शिक्षा को बढ़ावा देने का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए जागरूकता की मिसाल पेश की है।
जानकारी अनुसार न्यू बाई पास रोड पर स्थित मोयला की ढाणी मेघवाल बस्ती में कालूराम नेमीचंद हुक्माराम मुकेशकुमार तानाण की माताजी शान्तिदेवी का स्वर्गवास हो जाने पर तानाण परिवार की तरफ से मात्र शोक दिवस रखते हुए सारे सामाजिक ओर धार्मिक रस्में मात्र 7 दिन में पूरी की ओर मृत्यु भोज मौसर प्रथा को बंद कर समाज में बदलाव की एक नई दिशा दी।
समाजसेवी गंगाराम मेघवाल ने बताया कि मृत्यु के बाद होने वाले सारे क्रिया कर्म, हरिद्वार जाना, बैठक रखना, हवन पूजा सहित सभी कार्यक्रम मात्र सात दिवस में ही पूरे कर लिए गए और मौसर प्रथा को पूरी तरह बंद कर दिया गया।
शोकाकुल परिवार ने आमजन के विश्राम के लिए गांव के पीपल के पेड़ के नीचे सीमेंटेड टेबल-बेंच लगवाई तथा मौसर प्रथा में होने वाले खर्च को बच्चों की उच्च शिक्षा में खर्च करने का निर्णय लेकर सराहनीय पहल की।
समाजसेवी गंगाराम तानाण ने कहा कि पूरे समाज को भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहिए। सामाजिक कुरीतियां समाप्त हों, फिजूल खर्ची बंद हो और युवा पीढ़ी शिक्षित बने। उन्होंने कहा कि आज के समय में धन केवल शिक्षा पर खर्च होना चाहिए तथा दान-दक्षिणा भी लाइब्रेरी या सरकारी स्कूलों को देना चाहिए।
मेघवाल समाज के कई गांवों के बुद्धिजीवियों व बुजुर्गों ने 7 दिवस के शोक और मौसर प्रथा बंद करने पर तानाण परिवार का आभार जताया। इस अवसर पर बंकटलाल उमाराम, टिकमचंद, जगदीश प्रसाद, श्रवणकुमार, प्रकाशचंद, तिलोकचंद, राकेशकुमार तानाण, महेंद्रकुमार, राजेशकुमार नरपतराम, मोतीराम, दीपककुमार, पिन्टूराम, केलासचंद, रुपेशकुमार, धारूराम, बद्रीराम, खेमाराम, अभिषेक कुमार, बाबूलाल पँवार, तेजाराम मलिंडा, राजुराम, नरपतराम, किशोर कुमार तानाण आदि उपस्थित थे।




