राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डीडवाना के निर्देशानुसार बाल विवाह और घरेलू हिंसा के विरुद्ध विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
पेनल अधिवक्ता तलत हुसैन हनीफी ने जानकारी देते हुए बताया कि पीएम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मकराना में आयोजित इस शिविर में बच्चों को उनके अधिकारों, कानूनी सुरक्षा और सहायता तंत्र के बारे में सरल भाषा में समझाया गया।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह एक गंभीर अपराध है। कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह गैरकानूनी है। परिवार अक्सर गरीबी, परंपरा, कर्ज या असुरक्षा के कारण बच्चों की शादी कर देते हैं, लेकिन इससे समस्याएं और बढ़ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य को प्रभावित करता है और इससे घरेलू हिंसा की संभावना भी बढ़ जाती है। बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत ऐसे मामलों में माता-पिता, पुजारी और अन्य आयोजकों को 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
इसके अलावा POCSO एक्ट 2012 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की यौन गतिविधि को अपराध माना गया है, भले ही वे विवाहित हों। भारतीय न्याय संहिता 2023 में पति द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता पर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।
शिविर में बच्चों को बताया गया कि यदि उन पर शादी का दबाव बनाया जाए तो वे तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर संपर्क करें। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बच्चों को मुफ्त कानूनी सहायता और सहयोग भी उपलब्ध कराया जाता है।
इस दौरान 09 मई को न्यायालय परिसर मकराना में आयोजित होने वाली लोक अदालत के बारे में भी जानकारी दी गई।
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