मार्बल औद्योगिक क्षेत्र मकराना में खनन विवादों, अवैध खनन और कब्जे के मामलों के बीच अपर जिला एवं सेशन न्यायालय मकराना ने खान संख्या 70/2 (उलोड़ी रेंज) से जुड़े करीब 20 वर्ष पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
अदालत ने वादी अब्दुल जब्बार बनाम राज्य एवं अन्य तथा समेकित दीवानी मूल वाद जाबिर हुसैन बनाम राजस्थान मामले में निर्णय देते हुए खान संख्या 70/2 के लाइसेंस की पुश्त पर किए गए एंडोर्समेंट को अवैध और शून्य घोषित कर दिया। न्यायालय ने संबंधित रिकॉर्ड में प्रतिवादी संख्या 5 जाबिर हुसैन का नाम हटाकर वादी अब्दुल जब्बार के निधन के बाद उनके विधिक वारिसानों का नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही न्यायालय ने प्रतिवादी जाबिर हुसैन को खान संख्या 70/2 पर किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं करने का आदेश दिया है। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि न्यायालय के आदेशों की खुलेआम अवमानना की जा रही है और अवैध खनन की गतिविधियां जारी रखने की कोशिश हो रही है।
वादी पक्ष से जुड़े जावेद आलम ने मीडिया को बताया कि जाबिर अली पुत्र शौकत अली कथित रूप से खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत कर न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करते हुए खनन गतिविधियां शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका आरोप है कि खान पर मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत के भाई फरान अहमद गैसावत तथा उगमाराम जाट के नाम से 5 फरवरी 2022 को सात वर्षों के लिए एक स्टांप एग्रीमेंट किया गया था, जिसकी आड़ में अवैध खनन की तैयारी की जा रही है।
जावेद आलम ने आरोप लगाया कि न्यायालय के अंतिम फैसले से पहले भी खान पर अवैध ब्लास्टिंग और असुरक्षित खनन किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि हुई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में खान खनिज विभाग के अधीन है और असुरक्षित खनन की शिकायत मिलने पर विभागीय अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर क्रेन को सील किया तथा जाबिर अली को अवैध खनन नहीं करने का नोटिस भी जारी किया था।
इसके बावजूद अवैध खनन की आशंका जताते हुए जावेद आलम ने खनिज अभियंता मकराना और विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजकर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने, खान संख्या 70/2 के लाइसेंस में अब्दुल जब्बार के वारिसानों का नाम तत्काल दर्ज करने तथा न्यायालय की अवमानना करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।




