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मकराना के जनता क्लीनिकों पर भ्रष्टाचार के आरोप, जांच की मांग

मकराना के कालानाड़ा और बोरावड़ जनता क्लीनिकों के संचालन पर सवाल उठे हैं। गिरधर पलोड़ ने नियुक्ति, हाजिरी, दवाइयों और सरकारी भुगतान की जांच मांगी।

enews bharat - reporter lakshman singh10 October 2026
मकराना के जनता क्लीनिकों पर भ्रष्टाचार के आरोप, जांच की मांग

जनता क्लीनिक या भ्रष्टाचार का अड्डा? बिना बोर्ड सुनसान मकान में संचालन के आरोप

गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए जनता क्लीनिकों के संचालन को लेकर मकराना में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कालानाड़ा के वार्ड संख्या 55 और बोरावड़ के वार्ड संख्या 42 स्थित छप्पर बस्ती के जनता क्लीनिकों को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया, कर्मचारियों की उपस्थिति, दवाइयों के वितरण और सरकारी भुगतान की जांच की मांग की गई है।

भाजपा राजस्थान के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं डीडवाना-कुचामन जिला जन अभियोग अभाव एवं सतर्कता समिति के सदस्य गिरधर पलोड़ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शिकायत भेजी है। शिकायत में दोनों जनता क्लीनिकों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि क्लीनिकों के संचालन में कुछ अनियमितताएं हो सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

कालानाड़ा में बिना बोर्ड सुनसान मकान में क्लीनिक चलने का आरोप

शिकायत में कालानाड़ा के वार्ड संख्या 55 स्थित जनता क्लीनिक के संचालन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, निरीक्षण के दौरान क्लीनिक एक सुनसान मकान में संचालित मिला और वहां क्लीनिक का बोर्ड भी नजर नहीं आया।

शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि निरीक्षण के समय मौके पर केवल एक स्टाफ सदस्य मौजूद था। आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर क्लीनिक के नियमित रूप से पूरे दिन संचालित होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

यदि किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्धारित समय के अनुसार सेवाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं, तो इसका सीधा असर इलाज के लिए आने वाले जरूरतमंद लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में क्लीनिक के संचालन का समय, कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हालांकि, क्लीनिक के संचालन से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। प्रशासनिक रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कर्मचारियों की नियुक्ति में लाखों रुपये की कथित रिश्वत का आरोप

गिरधर पलोड़ ने अपनी शिकायत में कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जनता क्लीनिकों में कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर लाखों रुपये की कथित रिश्वत का लेन-देन हुआ है।

इसके साथ ही अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की कथित मिलीभगत से क्लीनिकों के संचालन के नाम पर सरकारी भुगतान उठाए जाने और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है।

इन आरोपों के मद्देनजर नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, चयन के आधार, कर्मचारियों के अनुबंध और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।

यदि जांच में नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या रिश्वत के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

पहले विनायक एंटरप्राइजेज, अब मेन पावर कंपनी के संचालन की जानकारी

गिरधर पलोड़ ने शिकायत में जनता क्लीनिकों के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, पहले इन क्लीनिकों के संचालन की जिम्मेदारी विनायक एंटरप्राइजेज के पास थी, जबकि वर्तमान में मेन पावर कंपनी के माध्यम से संचालन होने की जानकारी सामने आई है।

शिकायतकर्ता ने दोनों एजेंसियों से संबंधित अनुबंध, कार्यादेश, कर्मचारियों की नियुक्ति और सरकारी भुगतान के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।

इस जांच के तहत यह देखा जा सकता है कि संबंधित एजेंसियों को किन शर्तों पर काम सौंपा गया, कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई और क्लीनिकों में सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या जिम्मेदारियां तय की गई थीं।

इसके अलावा, शिकायत में मांग की गई है कि यदि किसी एजेंसी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अनियमितताएं प्रमाणित होने की स्थिति में संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठाई गई है।

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बोरावड़ के छप्पर बस्ती स्थित जनता क्लीनिक पर भी उठे सवाल

कालानाड़ा के साथ बोरावड़ के वार्ड संख्या 42 स्थित छप्पर बस्ती के जनता क्लीनिक को लेकर भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि दोनों क्लीनिकों के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि दोनों स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएं निर्धारित समय के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं। साथ ही, वहां तैनात कर्मचारियों की संख्या, उनकी उपस्थिति, दवाइयों की उपलब्धता और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का भी सत्यापन किया जाना चाहिए।

जनता क्लीनिकों का उद्देश्य आम लोगों को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि किसी केंद्र पर नियमित सेवाओं में कमी पाई जाती है, तो उसका असर सीधे उन लोगों पर पड़ सकता है जो इलाज के लिए इन केंद्रों पर निर्भर रहते हैं।

सरकारी भुगतान के बदले आमजन को मिल रही हैं सुविधाएं?

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जनता क्लीनिकों के संचालन के लिए जारी सरकारी राशि के बदले लोगों को निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।

इसके लिए केवल कागजी रिकॉर्ड देखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि क्लीनिकों के संचालन की वास्तविक स्थिति का भी सत्यापन करना जरूरी होगा। कर्मचारियों की उपस्थिति, मरीजों के रजिस्टर, दवाइयों के स्टॉक और वितरण तथा भुगतान के दस्तावेजों का आपस में मिलान करने से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।

यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो उसकी वजह का पता लगाना भी जरूरी होगा। वहीं, यदि क्लीनिक निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित हो रहे हैं, तो जांच से संबंधित व्यवस्थाओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

कालानाड़ा और बोरावड़ के जनता क्लीनिकों को लेकर की गई शिकायत ने स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों को सामने रखा है। गिरधर पलोड़ ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

अब मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत पर संबंधित विभाग और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं। क्या दोनों क्लीनिकों का निरीक्षण कर कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच की जाएगी? क्या नियुक्ति प्रक्रिया, दवाइयों की खरीद और वितरण तथा सरकारी भुगतान के रिकॉर्ड का सत्यापन होगा? और क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?

इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे। फिलहाल, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी व्यक्ति, अधिकारी या एजेंसी को दोषी ठहराने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर जांच पूरी होना जरूरी है।


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