जनता क्लीनिक या भ्रष्टाचार का अड्डा? बिना बोर्ड सुनसान मकान में संचालन के आरोप
गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए जनता क्लीनिकों के संचालन को लेकर मकराना में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कालानाड़ा के वार्ड संख्या 55 और बोरावड़ के वार्ड संख्या 42 स्थित छप्पर बस्ती के जनता क्लीनिकों को लेकर नियुक्ति प्रक्रिया, कर्मचारियों की उपस्थिति, दवाइयों के वितरण और सरकारी भुगतान की जांच की मांग की गई है।
भाजपा राजस्थान के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं डीडवाना-कुचामन जिला जन अभियोग अभाव एवं सतर्कता समिति के सदस्य गिरधर पलोड़ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को शिकायत भेजी है। शिकायत में दोनों जनता क्लीनिकों के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि क्लीनिकों के संचालन में कुछ अनियमितताएं हो सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
कालानाड़ा में बिना बोर्ड सुनसान मकान में क्लीनिक चलने का आरोप
शिकायत में कालानाड़ा के वार्ड संख्या 55 स्थित जनता क्लीनिक के संचालन पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, निरीक्षण के दौरान क्लीनिक एक सुनसान मकान में संचालित मिला और वहां क्लीनिक का बोर्ड भी नजर नहीं आया।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि निरीक्षण के समय मौके पर केवल एक स्टाफ सदस्य मौजूद था। आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर क्लीनिक के नियमित रूप से पूरे दिन संचालित होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
यदि किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर निर्धारित समय के अनुसार सेवाएं उपलब्ध नहीं हो रही हैं, तो इसका सीधा असर इलाज के लिए आने वाले जरूरतमंद लोगों पर पड़ सकता है। ऐसे में क्लीनिक के संचालन का समय, कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, क्लीनिक के संचालन से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है। प्रशासनिक रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कर्मचारियों की नियुक्ति में लाखों रुपये की कथित रिश्वत का आरोप
गिरधर पलोड़ ने अपनी शिकायत में कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि जनता क्लीनिकों में कर्मचारियों की नियुक्ति के नाम पर लाखों रुपये की कथित रिश्वत का लेन-देन हुआ है।
इसके साथ ही अधिकारियों और संबंधित एजेंसी की कथित मिलीभगत से क्लीनिकों के संचालन के नाम पर सरकारी भुगतान उठाए जाने और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी जताई गई है।
इन आरोपों के मद्देनजर नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों, चयन के आधार, कर्मचारियों के अनुबंध और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
यदि जांच में नियुक्ति प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता या रिश्वत के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
पहले विनायक एंटरप्राइजेज, अब मेन पावर कंपनी के संचालन की जानकारी
गिरधर पलोड़ ने शिकायत में जनता क्लीनिकों के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार, पहले इन क्लीनिकों के संचालन की जिम्मेदारी विनायक एंटरप्राइजेज के पास थी, जबकि वर्तमान में मेन पावर कंपनी के माध्यम से संचालन होने की जानकारी सामने आई है।
शिकायतकर्ता ने दोनों एजेंसियों से संबंधित अनुबंध, कार्यादेश, कर्मचारियों की नियुक्ति और सरकारी भुगतान के दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
इस जांच के तहत यह देखा जा सकता है कि संबंधित एजेंसियों को किन शर्तों पर काम सौंपा गया, कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया से हुई और क्लीनिकों में सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या जिम्मेदारियां तय की गई थीं।
इसके अलावा, शिकायत में मांग की गई है कि यदि किसी एजेंसी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अनियमितताएं प्रमाणित होने की स्थिति में संबंधित संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की मांग भी उठाई गई है।



