भाजपा कार्यकर्ताओं ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस मनाया
भारतीय जनसंघ के संस्थापक, शिक्षाविद, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी शहर मंडल मकराना द्वारा श्रद्धांजलि एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर मंडल कार्यालय इंदौरा वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी तथा उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व पार्षद ईश्वर बंजारा ने की। इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने देशहित को सर्वोपरि मानते हुए अनेक ऐतिहासिक निर्णयों और आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसकी प्रेरणा आज भी देशवासियों को मिलती है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए भाजपा शहर मंडल उपाध्यक्ष नोरतराम नायक ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अखंड भारत के सशक्त समर्थक थे। उन्होंने कहा कि देश की एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनका संघर्ष भारतीय राजनीति के इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं तथा युवाओं के लिए आदर्श हैं।
मंडल महामंत्री कृष्णा दाधीच ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर में लागू दो प्रधान, दो निशान और दो विधान की व्यवस्था का खुलकर विरोध किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए संघर्ष करते हुए 23 जून 1953 को उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके त्याग और राष्ट्रभक्ति के कारण ही देश में राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को नई दिशा मिली। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का सपना एक मजबूत, एकजुट और अखंड भारत का था, जिसे साकार करने के लिए प्रत्येक नागरिक को उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने शिक्षा, राष्ट्रवाद और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।




