मकराना स्थित गोविंद की गेया गौशाला में आयोजित अष्ट दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान कथावाचक सियाराम महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए भक्तों को आध्यात्मिक संदेश दिया।
उन्होंने पूतना उद्धार, शकटासुर और बकासुर वध के साथ-साथ श्रीकृष्ण की माखन चोरी लीला का विस्तार से वर्णन किया। सियाराम महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थ और संदेश से परिपूर्ण हैं।

महाराज ने बताया कि माखन चोरी वास्तव में चोरी नहीं, बल्कि भगवान का भक्त के प्रति प्रेम और अपनत्व का प्रतीक है। जब भक्त सच्चे मन से अपने भाव ईश्वर को समर्पित करता है, तो भगवान स्वयं उसके जीवन में प्रवेश करते हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान को बाहरी दिखावे या आडंबर की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वे केवल सच्चे भाव के भूखे होते हैं। जिस प्रकार दूध को मथकर माखन निकाला जाता है, उसी तरह जीवन की कठिनाइयों और साधना से शुद्ध भक्ति का जन्म होता है, जिसे भगवान स्वीकार करते हैं।
सियाराम महाराज ने श्रद्धालुओं से अहंकार त्याग कर सरलता और निष्कपट भाव से ईश्वर की भक्ति करने का आह्वान किया। कथा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति में लीन नजर आए।
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