देर रात खाना और बिगड़ी लाइफस्टाइल पर NIA के वाइस चांसलर की सलाह
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खाने का समय भी काफी बदल गया है। देर रात तक काम करना, रात में खाना खाना और दिनभर कम शारीरिक गतिविधि जैसी आदतें आम होती जा रही हैं। इसी बीच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (NIA) के वाइस चांसलर ने देर रात खाने और बिगड़ी लाइफस्टाइल को मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याओं से जोड़ते हुए सही समय पर अच्छा खाना खाने पर जोर दिया है।
देर रात खाना क्यों बन सकता है चिंता की वजह?
शरीर का मेटाबॉलिज्म और हमारी 24 घंटे की जैविक घड़ी एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। रिसर्च में यह देखा गया है कि देर से खाना और रात में ज्यादा कैलोरी लेना मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकता है। हालांकि केवल खाने का समय ही मोटापा या डायबिटीज का अकेला कारण नहीं है। खान-पान की गुणवत्ता, कुल कैलोरी, नींद, शारीरिक गतिविधि और दूसरी व्यक्तिगत परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं।
रात में खाने से ब्लड शुगर पर भी असर
वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि दिन के मुकाबले देर शाम या रात में खाने के बाद शरीर की ग्लूकोज प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। कुछ शोधों में रात के समय भोजन करने पर ब्लड ग्लूकोज बढ़ने की संभावना देखी गई है। यही वजह है कि भोजन के समय और भोजन की मात्रा को लेकर भी अध्ययन लगातार किए जा रहे हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि कभी देर से खाना खाने भर से किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाएगी। लंबे समय की खान-पान की आदतें और पूरी लाइफस्टाइल ज्यादा मायने रखती हैं।
सिर्फ खाना नहीं, पूरी लाइफस्टाइल भी जिम्मेदार
आज कई लोगों की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठे रहना, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित नींद और प्रोसेस्ड या ज्यादा कैलोरी वाले भोजन की आदत शामिल हो गई है। ऐसी कई आदतें मिलकर वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डाल सकती हैं।
रिसर्च भी बताती है कि भोजन का समय, भोजन की गुणवत्ता और शरीर की जैविक घड़ी के बीच संबंध है। इसलिए सिर्फ एक आदत बदलने के बजाय पूरी दिनचर्या को संतुलित रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
NIA वाइस चांसलर ने आयुर्वेद का भी किया जिक्र
NIA के वाइस चांसलर ने लाइफस्टाइल से जुड़ी इन समस्याओं को मैनेज करने में आयुर्वेद की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने अच्छे और सही समय पर भोजन करने पर जोर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, आयुर्वेदिक दृष्टिकोण को संतुलित खान-पान और बेहतर दिनचर्या के साथ अपनाने की बात कही गई।
हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए केवल किसी एक पद्धति पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। खासकर डायबिटीज जैसी स्थिति में दवा या इलाज अपने मन से बंद या बदलना उचित नहीं है।
सही समय और संतुलित भोजन पर जोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच भोजन के समय को लेकर रिसर्च का क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। इसे



