किसानों के अनुसार एक हेक्टेयर में लहसुन की बुवाई, कटाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण पर लगभग 35,000 रुपये तक का खर्च आता है। इसमें 10 से 15 हजार रुपये बीज, करीब 10 हजार रुपये कीटनाशक और लगभग 5-5 हजार रुपये अन्य खर्चों में शामिल होते हैं। लहसुन की बुवाई अक्टूबर माह में की जाती है और फसल मार्च तक तैयार हो जाती है।
लहसुन की कमाई काफी हद तक उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इस बार लहसुन के औसत भाव 10,000 से 11,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन के भाव 18,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे हैं। किसानों का कहना है कि बेहतर गुणवत्ता और निर्यात की स्थिति के आधार पर ही लाभ तय होता है।
इस बार फरवरी माह में बढ़े तापमान के कारण लहसुन का आकार सही तरीके से विकसित नहीं हो पाया, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए हैं। वर्ष 2025-26 में लहसुन की बुवाई लगभग 260.38 हेक्टेयर क्षेत्र में हुई, लेकिन उत्पादन अपेक्षा से कम रहा। जहां सामान्य परिस्थितियों में एक हेक्टेयर में 10 से 12 क्विंटल उत्पादन होता है, वहीं इस बार यह घटकर करीब 5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रह गया।
अब किसान लहसुन की बिक्री बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग और पैकेजिंग पर ध्यान दे रहे हैं। अलग-अलग गुणवत्ता के अनुसार 1 किलो से 20 किलो तक के पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। सही तरीके से पैक किया गया लहसुन लगभग 6 महीने तक सुरक्षित रह सकता है। पहले जहां किसान बिना गुणवत्ता पर ध्यान दिए लहसुन बाजार में भेज देते थे, वहीं अब बेहतर क्वालिटी और पैकेजिंग के साथ बाजार में उतार रहे हैं, जिससे उन्हें अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है।
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