कूकावास में 1000 पौधे बने विशाल वृक्ष, बनी हरियाली की मिसाल
निकटवर्ती कूकावास गांव आज पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है। वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान शुरू किए गए "आपणौ कूकावास, हरियालौ कूकावास" अभियान के तहत लगाए गए 1000 से अधिक पौधे अब विशाल वृक्षों का रूप ले चुके हैं। गांव की सड़कों, मंदिरों, विद्यालय, खेल मैदान, गौशालाओं, श्मशान घाट और तालाब किनारे फैली हरियाली आज गांव की नई पहचान बन गई है।
अभियान का नेतृत्व वाणिज्यिक कर अधिकारी एवं गोसेवक ओमप्रकाश बिश्नोई ने ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से किया। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड लगाए गए, ड्रिप एवं पाइपलाइन के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था की गई तथा नियमित देखरेख के लिए निजी स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई। इसी सतत प्रयास का परिणाम है कि आज गांव का वातावरण हरियाली से आच्छादित दिखाई देता है।
पिता-दादा की स्मृति में बनाई पंचवटी और प्याऊ
ओमप्रकाश बिश्नोई ने अपने पिता स्वर्गीय बुधाराम बिश्नोई एवं दादा स्वर्गीय पांचाराम मांजू की स्मृति में कूकावास विद्यालय में दो मंजिला प्याऊ का निर्माण करवाया। इसके साथ ही गांव में पंचवटी की स्थापना कर पीपल, वट, आंवला, अशोक और बिल्व जैसे धार्मिक महत्व के वृक्ष लगाए गए, जो आज धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं।
51 पौधों से विकसित हुई बिल्व वाटिका
श्री दूदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में लगाए गए 51 बिल्व पौधे अब एक सुंदर बिल्व वाटिका का स्वरूप ले चुके हैं। सावन माह में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां से बिल्व पत्र लेकर भगवान शिव का पूजन करते हैं।
इस वर्ष नर्मदा नहर से पानी की कम आवक के बावजूद गांव के युवाओं और भामाशाहों ने टैंकरों के माध्यम से पौधों को पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभाली है। ग्रामीणों का कहना है कि इस अभियान ने गांव की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल दी हैं। वृक्षों की घनी छांव राहगीरों, गौवंश और पक्षियों को राहत प्रदान कर रही है, वहीं कूकावास का यह मॉडल अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।




