कस्बे में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस श्रद्धा, भक्ति और भजन-कीर्तन का भक्तिमय माहौल देखने को मिला। कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा मिलन की मार्मिक लीला का वर्णन सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथावाचक महाराज ने भगवान की दिव्य लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान सच्चे मन से की गई भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं।
कथा में बताया गया कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य सांसारिक मोह-माया में उलझना नहीं, बल्कि भगवान के चरणों में प्रेम और भक्ति प्राप्त करना है। संसार के सुख क्षणभंगुर हैं, जबकि भगवान का स्मरण, सत्संग और सेवा ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
कथावाचक महाराज ने श्रद्धालुओं को सत्य, दया, सेवा, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन है।
भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों के साथ भक्ति रस में झूमते नजर आए। कथा के समापन पर महाआरती हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।
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