जन्माष्टमी पर कृष्णमय हुआ देश, मथुरा-द्वारका से नाथद्वारा तक भव्य आयोजन
बांसुरी की धुन, मंदिरों में गूंजते जयकारे और आधी रात होते ही चारों ओर कृष्ण नाम… जन्माष्टमी के मौके पर पूरा देश कान्हा की भक्ति में डूबा नजर आया। मथुरा से लेकर द्वारका और राजस्थान के नाथद्वारा तक भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की भव्य तस्वीरें देखने को मिलीं। मंदिरों में विशेष सजावट की गई और भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
मथुरा में आधी रात हुआ श्रीकृष्ण का प्राकट्य
भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव सबसे खास नजर आया। आधी रात भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किया गया। जैसे ही जन्म का समय हुआ, मंदिरों की घंटियां बज उठीं और श्रद्धालुओं ने ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारों के साथ भगवान का स्वागत किया।
मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में जन्माष्टमी को लेकर पहले से ही खास तैयारियां की गई थीं। मंदिरों को आकर्षक तरीके से सजाया गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए।
द्वारका में सोने की कामधेनु से अभिषेक
गुजरात के द्वारका में भी जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास रहा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन किए गए। इस दौरान सोने से सजी कामधेनु से भगवान का अभिषेक किया गया। इस भव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।
द्वारका में मंदिरों की सजावट और विशेष धार्मिक कार्यक्रमों के बीच भक्तों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया।
500 ड्रोन से दिखाई गईं कृष्ण लीलाएं
जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण लीलाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए भी लोगों तक पहुंचाया गया। आसमान में करीब 500 ड्रोन के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का शानदार प्रदर्शन किया गया। रोशनी और ड्रोन से बने अलग-अलग दृश्य लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
इस खास ड्रोन शो के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनकी लीलाओं को आसमान में प्रदर्शित किया गया, जिससे जन्माष्टमी के उत्सव में आधुनिक तकनीक का रंग भी देखने को मिला।
नाथद्वारा में श्रीनाथजी को 21 तोपों की सलामी
राजस्थान के नाथद्वारा में भी जन्माष्टमी का उत्सव खास अंदाज में मनाया गया। यहां भगवान श्रीनाथजी के जन्मोत्सव के मौके पर 21 तोपों की सलामी दी गई। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ श्रद्धालुओं ने जन्माष्टमी का उत्सव मनाया।



