श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ मनोहारी वर्णन, श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर
बोरावड़ कस्बे की शास्त्री कॉलोनी स्थित रामदेवजी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का श्रवण कर भक्तिरस में सराबोर हो गए।
कथा पंडाल में भगवान के जयकारों, भजनों और संकीर्तन से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कथा वाचक पंडित संजय कृष्ण शास्त्री ने चतुर्थ दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, बाल लीलाओं, पूतना वध, शकटासुर वध, तृणावर्त वध, वामन अवतार तथा गोप-गोपियों के साथ उनकी विभिन्न लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण और रोचक वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार धर्म की स्थापना, अधर्म के विनाश और भक्तों के कल्याण के लिए हुआ था। उनकी बाल लीलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मानव जीवन को धर्म, प्रेम और भक्ति का संदेश देने वाली प्रेरणादायक घटनाएं हैं।
अपने प्रवचन में पंडित संजय कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में मानवता को प्रेम, करुणा, मित्रता और धर्म का संदेश दिया। यदि व्यक्ति उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार ले तो उसका जीवन सुख, शांति और सफलता से परिपूर्ण हो सकता है।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही पूरा पंडाल "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और अनेक भक्त भावविभोर हो गए। महिलाओं ने मंगल गीत प्रस्तुत कर उत्सव का माहौल बना दिया, वहीं श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की।
कथा के दौरान वामन अवतार और श्रीकृष्ण लीला की आकर्षक एवं सजीव झांकियां भी सजाई गईं, जिन्होंने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर बोरावड़, चावंडिया, जाखली सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




