कोटा में शिक्षा और संरचनात्मक सुधार को गति देने के लिए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने मंगलवार को इंद्र विहार स्थित अपने आवास पर एक विशेष बैठक आयोजित की। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग, पीडब्ल्यूडी, समसा और पंचायत समिति के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने बैठक में कोटा स्कूलों में बरसात से पहले लीकेज, सीपेज और छत टपकने की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए। इस बैठक का उद्देश्य केवल मरम्मत कार्य की समीक्षा करना नहीं था, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित, संरचित और व्यवस्थित स्कूल वातावरण सुनिश्चित करना था। मंत्री नागर ने अधिकारियों को हिदायत दी कि सभी कार्य समयबद्ध, गुणवत्ता सुनिश्चित और प्रभावी मॉनिटरिंग के तहत किए जाएँ।
स्कूलों में लीकेज और छत टपकने की समस्या का समाधान
बैठक में मंत्री नागर ने विशेष रूप से स्कूलों की छत टपकने, पानी भरने और लीकेज की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि बरसात से पहले इन समस्याओं का समाधान होना अनिवार्य है, ताकि बच्चों की पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छतों की सफाई के लिए पोर्टेबल सीढ़ियों की व्यवस्था की जाए और वॉटर प्यूरीफायर कार्य को अलग एजेंसी के माध्यम से किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मरम्मत कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएँ। इस पहल से बच्चों और शिक्षकों के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित होगा।
आपदा राहत और मरम्मत कार्यों की समीक्षा
मंत्री नागर ने अतिवृष्टि और आपदा राहत के तहत जर्जर हुए स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्य की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रति स्कूल 2 लाख रुपए की राशि का उपयोग मरम्मत कार्यों में समय पर और प्रभावी ढंग से किया जाए। ये कार्य पीडब्ल्यूडी, समसा और पंचायत समिति के माध्यम से कराए जा रहे हैं। मंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि सभी कार्यों की मॉनिटरिंग प्रभावी ढंग से हो, ताकि मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता में कोई कमी न आए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्कूल की मरम्मत अधूरी या अपूर्ण नहीं होनी चाहिए।
सख्त मॉनिटरिंग और गुणवत्ता सुनिश्चित करना
बैठक के दौरान समसा के अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में चल रहे सिविल कार्य की मॉनिटरिंग के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इस पर मंत्री नागर ने चीफ सेक्रेटरी से फ़ोन पर चर्चा की और कहा कि कोटा के 1100 स्कूलों पर केवल एक एईएन और दो जेईएन कार्यरत हैं। इस कारण मार्गदर्शन और निगरानी में कमी आ रही है। मंत्री ने कहा कि सभी स्कूलों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्थायी और प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस विषय में शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से चर्चा कर उचित व्यवस्था की जाएगी।
बच्चों और शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण
मंत्री नागर ने कहा कि स्कूलों में बरसात के दौरान भी बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके लिए सभी मरम्मत कार्य समय से पहले पूरा करने होंगे और छत, लीकेज और पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा। इस पहल से न केवल बच्चों का सुरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित होगा, बल्कि स्कूलों में आने वाले अभिभावकों का विश्वास भी मजबूत होगा। बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, सभी अधिकारियों को सख्त निगरानी और समयबद्ध कार्यान्वयन के निर्देश दिए गए।




