भोजन की गुणवत्ता और स्कूल में निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कोटा में मिड-डे मील में कथित गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया है। रानपुर क्षेत्र के पूनिया देवरिया स्थित सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 27 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया और उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
बताया जा रहा है कि बच्चों को मिड-डे मील में कद्दू की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाने के बाद कुछ बच्चों को उल्टी, पेट दर्द और घबराहट जैसी शिकायतें होने लगीं। देखते ही देखते कई बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना सामने आई, जिसके बाद स्कूल प्रशासन ने तत्काल बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की।
घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के परिजन भी चिंतित हो गए और अस्पताल पहुंचने लगे। अस्पताल में बच्चों का उपचार किया गया। फिलहाल बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या रही, यह प्रशासन की जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा मुद्दा स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और उसकी निगरानी को लेकर सामने आया है। बच्चों के लिए तैयार होने वाले भोजन की गुणवत्ता, सामग्री की जांच और खाना परोसने से पहले उसकी निगरानी कितनी प्रभावी है, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मिड-डे मील का उद्देश्य बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और उनकी सेहत को बेहतर बनाना है। ऐसे में अगर भोजन की गुणवत्ता में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।



