कस्बे की कृषि उपज मंडी में लगे राजफेड के सरकारी कांटे पर शुक्रवार शाम गेहूं बेचने पहुंचे आधा दर्जन से अधिक किसानों की फसलों की न तो तुलाई हुई और न ही उनके बिल बनाए गए। ऐसे में किसानों को शनिवार शाम तक इंतजार करने के बाद भी समाधान नहीं मिला और उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
पीड़ित किसानों ने शनिवार को समस्या के समाधान के लिए मांगरोल उप जिला कलेक्टर को भी अवगत कराया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों को मजबूरन अपनी ट्रॉलियों में माल पुनः भरवाकर गांव लौटना पड़ा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
बमोरी कला निवासी गिरिराज नागर सहित अन्य किसानों ने बताया कि गुरुवार को बारां जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा जन चौपाल कार्यक्रम के तहत बमोरी कला पहुंचे थे। इस दौरान किसानों ने बमोरी कला में लगे राजफेड के कांटे पर गेहूं की तुलाई नहीं होने की शिकायत की थी। शिकायत पर जिला कलेक्टर ने संबंधित सहकारी समिति ग्राम सेवक को शेष किसानों की फसल की तुलाई एवं बिल बनाने के निर्देश दिए थे।
कलेक्टर के निर्देशों के बाद शुक्रवार को बमोरी कला के आधा दर्जन से अधिक किसान अपनी गेहूं की फसल लेकर मांगरोल कृषि उपज मंडी पहुंचे। हालांकि शनिवार शाम तक भी उनके माल की तुलाई नहीं हो सकी और न ही ऑनलाइन बिल जारी किए गए। किसानों का आरोप है कि पूरे दिन इंतजार के बावजूद कोई जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्या सुनने मौके पर नहीं पहुंचा।
वहीं सहकारी सेवा समिति बमोरी कला के ग्राम सेवक एवं व्यवस्थापक जुगल किशोर शर्मा ने बताया कि अंता मार्केटिंग मैनेजर के निर्देश पर 40 से 45 पंजीकृत किसानों की शेष फसल की तुलाई कराने के लिए मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए तोल कांटा बमोरी कला से मांगरोल कृषि उपज मंडी में स्थानांतरित किया गया था। उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार निर्धारित लिमिट पूरी हो जाने के कारण किसानों के ऑनलाइन बिल जारी नहीं हो पा रहे हैं।
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