केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (सीएसडब्ल्यूआरआई), अविकानगर मालपुरा (टोंक) द्वारा भारत सरकार के "खेत बचाओ अभियान" के तहत टोंक जिले की मालपुरा तहसील के हनोतिया, किशनपुरा, कल्याणपुरा तथा फागी तहसील के मेहंदवास गांवों में किसान जागरूकता चौपालों का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम 09 और 10 जून 2026 को आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना और संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का नेतृत्व संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में किया गया। वैज्ञानिक टीम का संचालन डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा, डॉ. अजय कुमार और सत्यवीर सिंह डांगी द्वारा किया गया।
चौपाल में वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं और कृषि विभाग की सिफारिशों के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग करें।
विशेषज्ञों ने किसानों को जैविक विकल्पों जैसे देशी गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट), बायोफर्टिलाइजर, राइजोबियम कल्चर, एजोटोबैक्टर, पीएसबी और एजोस्पाइरिलम के उपयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही प्राकृतिक खेती अपनाने पर भी जोर दिया गया।
वैज्ञानिकों ने बताया कि जैविक और देशी खादों के उपयोग से न केवल मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि उत्पादन लागत में भी कमी आती है और किसानों का लाभ बढ़ता है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को प्रेरित करते हुए कहा गया कि सभी मिलकर इस अभियान को सफल बनाएं ताकि देश की मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर हो सके। मीडिया प्रभारी डॉ. अमरसिंह मीना ने बताया कि इस चौपाल में 234 से अधिक किसानों (180 पुरुष एवं 54 महिलाएं) ने भाग लिया और मिट्टी संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में डॉ. चंदन गुप्ता, डॉ. राजेश बिश्नोई, डॉ. हरिसिंह मीना, डॉ. सरोबाना सरकार, डॉ. सृष्टि सोनी, महेशचंद मीना, गौतम चौपड़ा, लोकेश मीना, अंशुल शर्मा एवं राजेंद्र राजावत का भी सहयोग रहा।




