खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती की दी जानकारी
आईसीएआर-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा 5 जून 2026 को टोंक जिले के बन का खेड़ा, देंचवास एवं घाटी गांवों में "खेत बचाओ अभियान" के अंतर्गत किसान जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अभियान के तहत आयोजित किसान संगोष्ठियों में उर्वरकों एवं कीटनाशकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में कुल 325 किसानों ने भाग लेकर खेती और पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, मृदा परीक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जैविक खाद एवं गोबर की खाद के महत्व के बारे में जागरूक किया।
वैज्ञानिकों ने एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (Integrated Nutrient Management) के अंतर्गत जैविक खाद, जैव उर्वरकों और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं संयुक्त उपयोग पर जोर दिया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी भी किसानों को दी गई।
कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने और टिकाऊ कृषि को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया। किसानों को बताया गया कि जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियां भविष्य की कृषि को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बना सकती हैं।
पशुपालन विषय पर आयोजित सत्र में किसानों को ग्रीष्मकाल के दौरान पशुओं के आहार, प्रजनन एवं स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। विशेषज्ञों ने संतुलित आहार एवं खनिज मिश्रण के उपयोग से पशुओं में हीट स्ट्रेस कम करने तथा प्रमुख पशु रोगों की रोकथाम और उपचार के उपायों की जानकारी भी साझा की।
यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. सत्यवीर सिंह डागी, डॉ. अमर सिंह मीना, डॉ. सृष्टि सोनी, श्री योगीराज मीणा एवं श्री गौतम चोपड़ा का विशेष योगदान रहा।
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