केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर, मालपुरा टोंक द्वारा आज दिनांक 18.06.2026 को प्रातः 07:30 बजे ग्राम अम्बापुरा में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत चौपाल का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 57 पुरुष एवं 38 महिला किसानों ने भाग लिया और कृषि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
चौपाल के दौरान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लीलाराम गुर्जर ने किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती एवं जल संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इसलिए किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए।
डॉ. गुर्जर ने किसानों को वर्मी कंपोस्ट, हरी खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ का मुख्य उद्देश्य खेत, किसान और मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि उपजाऊ बनी रहे।
उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान के माध्यम से किसानों तक आधुनिक खेती की तकनीक, मौसम आधारित कृषि पद्धतियां एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जा रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके।
कार्यक्रम के अंत में किसानों की समस्याएं सुनी गईं और उनके समाधान के लिए आवश्यक सुझाव भी दिए गए। किसानों ने अपनी जिज्ञासाओं को विशेषज्ञों के समक्ष रखा, जिनका मौके पर ही समाधान किया गया।
इसी क्रम में 17 जून को मालपुरा तहसील के नयागांव लावा, टोरडी एवं चौसला में भी अविकानगर की वैज्ञानिक टीम द्वारा रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में 200 से अधिक किसानों ने भाग लेकर लाभ प्राप्त किया।
इन सभी कार्यक्रमों में डॉ. सिद्धार्थ सारथी मिश्रा, डॉ. पी.के. मलिक, डॉ. राजेश बिश्नोई, डॉ. सत्यवीर सिंह डांगी, डॉ. अमर सिंह मीना, डिग्गी अनुसंधान केंद्र प्रभारी डॉ. रविकुमार मीना, सीताराम मीना, गौतम चोपड़ा, डॉ. सृष्टि सोनी, हेमा मीना एवं अंशुल शर्मा सहित कई वैज्ञानिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।




