केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर, मालपुरा टोंक द्वारा ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत मालपुरा तहसील के गगांव हाथकी, मण्डा एवं लसाडिया में किसानों एवं पशुपालकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कृषि रसायनों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों को नियमित रूप से मृदा परीक्षण (Soil Testing) करवाने तथा परीक्षण की अनुशंसाओं के अनुसार ही उर्वरकों के उपयोग की सलाह दी।
डॉ. गरिमा चौधरी ने किसानों एवं पशुपालकों को फसल चक्र (क्रॉप रोटेशन), मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा मृदा संरक्षण के विभिन्न उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि “मिट्टी स्वस्थ होगी तभी मनुष्य और पशु दोनों स्वस्थ रहेंगे।” उन्होंने किसानों को पारंपरिक एवं प्रकृति आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे भूमि की जैविक गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार हो सके।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार विभिन्न फसलों में समयानुसार किए जाने वाले कृषि कार्यों की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
इस अवसर पर कुल 162 पुरुष एवं महिला किसानों एवं पशुपालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर चर्चा कर उनका समाधान भी किया गया।
खेत बचाओ अभियान में अविकानगर की चार टीमों द्वारा सक्रिय भागीदारी की गई, जिनमें डॉ. पी.के. मलिक, डॉ. डी.के. शर्मा, डॉ. गरिमा चौधरी, डॉ. राजेश बिश्नोई, डॉ. रणजीत सिंह गोदारा, डॉ. सृष्टि सोनी, महाराम मीना, सीताराम मीना, गौतम चोपड़ा एवं अंशुल शर्मा सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।




