खाटूश्यामजी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी तैयारी
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी तैयारी चल रही है। हर साल बड़ी संख्या में भक्त बाबा श्याम के दर्शन करने पहुंचते हैं। खासकर मेलों और विशेष अवसरों पर यहां भीड़ बढ़ने से पार्किंग, प्रतीक्षा और आवागमन जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
इन्हीं व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए मंदिर के आसपास आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत शुरू की गई इस परियोजना में पार्किंग से लेकर श्रद्धालुओं के बैठने, ठहरने और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए सुविधाएं तैयार की जा रही हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, परियोजना का करीब 45 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और बाकी काम मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंदिर से पहले विकसित हो रहा आधुनिक सुविधा केंद्र
परियोजना के तहत खाटूश्यामजी मंदिर से करीब दो किलोमीटर पहले रींगस रोड पर साढ़े पांच एकड़ जमीन में आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करना और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
इस परियोजना में मल्टीलेवल पार्किंग, श्रद्धालुओं के लिए प्रतीक्षालय, कथा पांडाल और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। इससे उम्मीद है कि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को वाहन खड़े करने और अपनी बारी का इंतजार करने में पहले से बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
2,500 लोगों की क्षमता वाला कथा पांडाल
इस विकास परियोजना की खास सुविधाओं में 2,500 लोगों की क्षमता वाला कथा पांडाल भी शामिल है। यहां धार्मिक कथाओं और अन्य आयोजनों के लिए व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसके अलावा डिजिटल म्यूजियम बनाया जा रहा है, जहां श्रद्धालुओं को धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है। लाइट एंड साउंड शो के लिए ओपन एयर थिएटर भी विकसित किया जा रहा है।
इन सुविधाओं से खाटूश्यामजी आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिल सकेगा।
760 कारों और 25 बसों की पार्किंग की व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की समस्या कम करना इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। प्रस्तावित मेला ग्राउंड में 760 कारों और 25 बसों की पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है।
इसके साथ ही फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, शौचालय और यात्रियों के लिए शेल्टर जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इन व्यवस्थाओं से श्रद्धालुओं को भोजन, विश्राम और अन्य जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।



