खंडार खंड के बहराउण्डा मंडल पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं और बालिकाओं द्वारा खारा कुआं बावड़ी से भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जो खंडार रोड, भगत सिंह चौराहा और सब्जी मंडी होते हुए गोत्तम मैरिज गार्डन तक पहुंची।
सम्मेलन पांडाल में पहुंचने के बाद राम भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया। मंच पर संत मोहन दास जी महाराज विराजमान रहे।
मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सवाई माधोपुर जिले के जिला प्रचारक श्री सचिन कुमार ने कहा कि विभिन्न जातियों के सम्मेलन होते रहे हैं, लेकिन बहराउण्डा खुर्द में पहली बार सर्व समाज का विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित हुआ है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपने देश को ‘मां’ कहकर पुकारता है और भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जहां मातृभूमि को पूजनीय माना जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत की अखंडता और अक्षुण्णता बनाए रखने के लिए हिंदू समाज का संगठित रहना आवश्यक है। 1857 की क्रांति के समय भारत का क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किलोमीटर था, जो विभाजन के बाद घटकर 33 लाख वर्ग किलोमीटर रह गया। आक्रांताओं ने समाज को विभाजित कर देश के टुकड़े किए।
वक्ताओं ने महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि करोड़ों लोगों का एक साथ स्नान करना भारतीय संस्कृति की एकता का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जातिभेद हिंदू धर्म का मूल भाग नहीं है, बल्कि परिस्थितिजन्य विकृति है। हिंदू समाज मूलतः कर्मप्रधान और समरसता का पक्षधर रहा है।
सम्मेलन में पंच परिवर्तन, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व-अतीत का बोध और कुटुंब प्रबोधन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि समाज अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देगा तो भारत को परम वैभवशाली राष्ट्र बनाया जा सकता है।
संत मोहन दास जी महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि जिस प्रकार पेड़ की जड़ में पानी देने से पेड़ हरा-भरा रहता है, उसी प्रकार भारत के मूल समाज को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने गौ सेवा और संरक्षण की महिमा का भी शास्त्रोक्त वर्णन किया।
आसपास के गांवों से आए सैकड़ों महिला-पुरुषों ने सम्मेलन में भाग लेकर सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया। अंत में प्रसादी वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।




